पटवारियों और भू माफिया की मिलीभगत: सरकारी जमीन का फर्जी मुआवजा, रायपुर विशाखापट्टनम कॉरिडोर में बड़ा फर्जीवाड़ा

Bharatmala Patwari Scam: छत्तीसगढ़ की भारतमाला परियोजना में EOW ने तीन पटवारियों के खिलाफ पहला पूरक चालान कोर्ट में पेश किया है। मामले में पटवारियों और भू माफियाओं की मिलीभगत भी सामने आई है। करीब 40 करोड़ रुपये का गलत मुआवजा दिलाया गया।

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Bharatmala Patwari Scam: छत्तीसगढ़ की भारत माला परियोजना में मुआवजा वितरण के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने इस मामले में तीन पटवारियों (Patwari) के खिलाफ पहला पूरक चालान कोर्ट में पेश किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि सरकारी जमीन को निजी बताकर करीब 40 करोड़ रुपये का गलत मुआवजा दिलाया गया। मामले में पटवारियों और भू माफियाओं की मिलीभगत भी सामने आई है।

दस्तावेज में हेरफेर कर रचा गया आपराधिक षड्यंत्र

EOW की जांच के अनुसार रायपुर विशाखापट्टनम प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर के भू अर्जन मामलों में पटवारियों ने भू माफियाओं के साथ मिलकर आपराधिक षड्यंत्र रचा। मूल दस्तावेज में हेरफेर कर अधिग्रहित सरकारी भूमि को दोबारा निजी जमीन दिखाया गया। इसके साथ ही निजी जमीनों के गलत मुआवजा प्रकरण बनाए गए और बैकडेट में खाता बंटवारा व नामांतरण के फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए।

क्या है भारत माला परियोजना

भारत माला परियोजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना है, जिसके तहत करीब 26 हजार किलोमीटर आर्थिक कॉरिडोर विकसित किए जाने हैं। रायपुर विशाखापट्टनम कॉरिडोर इसी परियोजना का अहम हिस्सा है, जहां जमीन अधिग्रहण के नाम पर यह बड़ा घोटाला सामने आया है।

मामले में आगे की जांच जारी है और EOW अन्य आरोपियों की भूमिका भी खंगाल रही है।सरकारी डॉक्टर पद पर नियुक्ति का लालच देकर युवक से ठगे गए 20 लाख, चेक बाउंस कर ठगी की मंशा उजागर

दुर्ग जिले में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 20 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस प्रकरण में महासमुंद निवासी एक युवक को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने शासकीय चिकित्सक के पद पर नौकरी लगाने का भरोसा दिलाकर बड़ी रकम हड़प ली थी। मामला थाना सिटी कोतवाली दुर्ग क्षेत्र का है।

29 अक्टूबर को हुई थी गिरफ्तारी

EOW के मुताबिक इस मामले में दिनेश पटेल, लेखराम देवांगन और बसंती घृतलहरे को 29 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। अब 24 जनवरी 2026 को इनके खिलाफ पहला पूरक चालान कोर्ट में पेश किया गया है। आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7(सी), 12 और भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 467, 471, 420 और 120 बी के तहत अपराध दर्ज है।

NHAI ने भी जताई थी आपत्ति

रायपुर विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर में हुई गड़बड़ियों पर NHAI अधिकारियों ने आपत्ति दर्ज की थी। इसके बाद जांच रिपोर्ट राजस्व विभाग को भेजी गई और मुआवजा वितरण पर रोक लगाई गई। 

बैकडेट दस्तावेजों से बढ़ाई गई मुआवजा राशि

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि अभनपुर क्षेत्र में पदस्थ अधिकारियों ने बैकडेट में दस्तावेजों में गड़बड़ी की। ग्राम नायकबांधा और उरला में सर्वे से पहले एक परिवार के पास मौजूद चार एकड़ जमीन को कुछ ही दिनों में 14 लोगों के नाम पर बांट दिया गया। इसके बाद उसी परिवार के सदस्यों को करीब 70 करोड़ रुपये का मुआवजा दे दिया गया।

कई अधिकारियों के ठिकानों पर हुई थी छापेमारी

25 अप्रैल 2025 को EOW ने रायपुर, महासमुंद, दुर्ग और बिलासपुर में 17 से 20 अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें SDM, तहसीलदार, पटवारी, राजस्व निरीक्षक समेत कई अधिकारी शामिल थे। छापेमारी के दौरान अहम दस्तावेज जब्त किए गए।

नौकरी का झांसा देकर वसूली गई बड़ी रकम

जानकारी के अनुसार अंजोरा निवासी सचिन मालगी ने 29 अगस्त 2025 को सिटी कोतवाली दुर्ग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि आरोपी विकास चंद्राकर ने उसे शासकीय चिकित्सक की नौकरी लगवाने का भरोसा दिया। इसी भरोसे में आकर पीड़ित ने मई 2023 में आरोपी को 20 लाख रुपये दिए। लंबे समय तक इंतजार के बावजूद न तो नौकरी लगी और न ही पूरी राशि वापस की गई।

पूछताछ में सामने आया पूरा ठगी का तरीका

शिकायत की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी की पतासाजी कर उसे हिरासत में लिया और पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने डॉक्टर की सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर 20 लाख रुपये लिए थे। बाद में दबाव बढ़ने पर आरोपी ने पीड़ित और उसकी पत्नी के बैंक खातों में अलग अलग किश्तों में 8 लाख रुपये वापस किए।

चेक बाउंस कर की गई धोखाधड़ी

शेष 13 लाख रुपये लौटाने के लिए आरोपी ने अपने बैंक खाते से 5 लाख और 8 लाख रुपये के दो चेक दिए। जांच में सामने आया कि आरोपी ने जानबूझकर खाते में पे ऑप्शन सक्रिय नहीं कराया, जिसके चलते दोनों चेक बाउंस हो गए।

पुलिस ने माना ठगी की मंशा

पुलिस का कहना है कि आरोपी द्वारा तकनीकी प्रक्रिया जानबूझकर पूरी नहीं कराना उसकी धोखाधड़ी की मंशा को स्पष्ट करता है। इसी आधार पर आरोपी के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध कर उसे गिरफ्तार किया गया और न्यायालय में पेश किया गया।

अन्य मामलों की भी जांच जारी

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी ने इसी तरह की ठगी और लोगों से की है या नहीं। साथ ही आम जनता से अपील की गई है कि किसी भी प्रकार की सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें और ऐसे मामलों की तत्काल पुलिस को सूचना दें।

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