Bilaspur Train Accident: बिलासपुर ट्रेन हादसे पर CRS की प्रारंभिक रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, रेलवे सिस्टम और अफसरों पर उठे गंभीर सवाल

बिलासपुर में 4 नवंबर को हुए भीषण ट्रेन हादसे की प्रारंभिक CRS रिपोर्ट में रेलवे प्रशासन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। साइको टेस्ट में फेल लोको पायलट को मेमू ट्रेन चलाने की अनुमति दी गई, रजिस्टर और सर्विस रिकॉर्ड सही से दर्ज नहीं किए गए।

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Bilaspur Train Accident: बिलासपुर में 4 नवंबर 2024 को हुए भीषण ट्रेन हादसे की कमिशन ऑफ रेलवे सेफ्टी (Commission of Railway Safety – CRS) की प्रारंभिक रिपोर्ट अब सामने आ गई है। इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि यह हादसा किसी तकनीकी खराबी से नहीं, बल्कि रेलवे सिस्टम की बड़ी लापरवाही और अफसरों की गलत अनुमति की वजह से हुआ।

गौर करने वाली बात यह है कि जिस मेमू (MEMU) को चलाने की अनुमति दी गई थी, उसके लोको पायलट ने साइकोलॉजिकल टेस्ट (Psychological Test) पास ही नहीं किया था।

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साइको टेस्ट फेल होने के बाद भी मिली अनुमति

रिपोर्ट के अनुसार, 22 नवंबर 2024 को हुए CLI ग्रेडिंग में लोको पायलट के सुरक्षा नियमों, नई करेक्शन स्लिप्स और ऑपरेटिंग मानकों की समझ को संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बावजूद रेलवे अधिकारियों ने उसे मेमू चलाने की अनुमति दे दी।
CRS की रिपोर्ट में कहा गया है कि:

  • ट्रेन चलाने का सर्टिफिकेट जारी करने में गंभीर अनियमितताएं हुईं।

  • न सर्विस रिकॉर्ड ठीक से भरे गए, न ही रजिस्टर अपडेट किए गए।

  • यह सब रेलवे बोर्ड के आदेशों का सीधा उल्लंघन है।

दुर्घटना में 12 की मौत, 20 से अधिक घायल

4 नवंबर की शाम लालखदान के पास, गेवरारोड से बिलासपुर आ रही मेमू ट्रेन ने खड़ी मालगाड़ी को जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि लोको पायलट सहित 12 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक यात्री घायल हो गए।

CRS ने दूसरे ही दिन की मौके पर जांच

हादसे के अगले दिन, कोलकाता में पदस्थ मुख्य संरक्षा आयुक्त बीके मिश्रा (BK Mishra) अपनी टीम के साथ बिलासपुर पहुंचे। उन्होंने:

  • घटनास्थल का निरीक्षण किया

  • मेमू ट्रेन में बैठकर ट्रायल रन किया

  • दस्तावेजों की जांच की

जांच के दौरान 91 से अधिक अधिकारी और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए।

जोन ने नियम तोड़े, CRS ने दलील खारिज की

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने रेलवे बोर्ड के 15 अक्टूबर 2024 के आदेश का उल्लंघन किया।
रेलवे बोर्ड ने आदेश दिया था कि “बिना मनोवैज्ञानिक परीक्षण पास किए किसी भी लोको पायलट को मेमू चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।”

जोन के अधिकारियों ने दलील दी कि फेल लोको पायलट को असिस्टेंट लोको पायलट के साथ ड्यूटी देकर ट्रेन चलाई जा सकती है।
लेकिन CRS ने इस तर्क को सीधा खारिज कर दिया।

अभी अंतिम रिपोर्ट आनी है, तय होगी जवाबदेही

रेलवे प्रशासन ने कहा है कि वे प्रारंभिक रिपोर्ट पर अपना जवाब देंगे। उसके बाद ही CRS अंतिम रिपोर्ट जारी करेगा। सीनियर DCM अनुराग सिंह ने कहा “फाइनल रिपोर्ट के बाद ही रेलवे अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।”

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