छत्तीसगढ़ राज्यसभा चुनाव 2018 पर हाईकोर्ट में सुनवाई: कांग्रेस प्रत्याशी के 9 गवाहों की गवाही पूरी, अब सरोज पांडेय और समर्थकों की होगी पेशी

छत्तीसगढ़में साल 2018 के राज्यसभा चुनाव से जुड़ी चुनाव याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई निर्णायक चरण में पहुंच गई है। कांग्रेस प्रत्याशी लेखराम साहू की ओर से पेश किए गए सभी 9 गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी है।

Bilaspur High Court

CG Rajya Sabha Election Petition: छत्तीसगढ़ में वर्ष 2018 में हुए राज्यसभा चुनाव से जुड़ा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस चुनाव को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई कर रहे हाईकोर्ट में अब एक अहम चरण पूरा हो गया है। कांग्रेस प्रत्याशी लेखराम साहू की ओर से प्रस्तुत किए गए कुल 9 गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी है। अब मामले में भाजपा नेत्री सरोज पांडेय और उनके समर्थकों की गवाही दर्ज की जाएगी।

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2018 का राज्यसभा चुनाव और विवाद

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मार्च 2018 में छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की एक सीट के लिए चुनाव हुआ था। इस चुनाव में भाजपा ने सरोज पांडेय को अपना प्रत्याशी बनाया था, जबकि कांग्रेस ने लेखराम साहू को मैदान में उतारा था। चुनाव प्रक्रिया के दौरान ही कांग्रेस प्रत्याशी ने सरोज पांडेय के नामांकन पत्र और शपथ पत्र पर गंभीर सवाल उठाए थे।

कांग्रेस का आरोप था कि सरोज पांडेय ने अपने शपथ पत्र में कई महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई हैं, जो चुनाव नियमों के खिलाफ है। हालांकि, उस समय के निर्वाचन अधिकारी ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया था।

चुनाव आयोग और राज्यपाल तक पहुंचा मामला

नामांकन से जुड़ा विवाद यहीं नहीं थमा। यह मामला केंद्रीय चुनाव आयोग और राज्यपाल तक भी पहुंचा, लेकिन इसके बावजूद मतदान की प्रक्रिया पूरी की गई। अंततः मतगणना के बाद सरोज पांडेय को विजयी घोषित कर दिया गया।

चुनाव परिणाम के बाद हाईकोर्ट में याचिका

चुनाव में हार के बाद कांग्रेस प्रत्याशी लेखराम साहू ने सरोज पांडेय के निर्वाचन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की। याचिका में शपथ पत्र में गलत जानकारी देने और कथित रूप से अपात्र विधायकों को मतदान की अनुमति देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए।

यह मामला लंबे समय से न्यायालय में लंबित है और इस पर नियमित रूप से सुनवाई चल रही है।

18 विधायकों के मतदान पर उठे सवाल

याचिका में कांग्रेस पार्टी और लेखराम साहू की ओर से यह भी दावा किया गया कि भाजपा के 11 विधायक संसदीय सचिव थे और 7 विधायक निगम-मंडलों में अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के पद पर थे। इस आधार पर आरोप लगाया गया कि ये सभी विधायक ‘लाभ का पद’ धारण कर रहे थे और इसलिए उन्हें मतदान का अधिकार नहीं दिया जाना चाहिए था।

कांग्रेस की ओर से कुल 18 विधायकों को मतदान से वंचित करने की मांग की गई थी। हालांकि, उस समय राज्यसभा निर्वाचन अधिकारी ने इन सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया था।

9 गवाहों की गवाही पूरी

हालिया सुनवाई के दौरान विधानसभा के तत्कालीन महासचिव चंद्रशेखर गंगराड़े की गवाही दर्ज की गई। इसके साथ ही लेखराम साहू की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले सभी 9 गवाहों की गवाही पूरी हो गई है। यह याचिकाकर्ता पक्ष के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

अब बचाव पक्ष की बारी

सरोज पांडेय की ओर से उनके अधिवक्ता ने न्यायालय में शपथ पत्र और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा। हाईकोर्ट ने इस मांग को स्वीकार कर लिया है। अब अगली सुनवाई में सरोज पांडेय और उनके द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले गवाहों की गवाही दर्ज की जाएगी।

फैसले पर टिकी निगाहें

राजनीतिक हलकों में इस मामले पर खास नजर बनी हुई है। करीब आठ साल पुराने राज्यसभा चुनाव से जुड़े इस केस का फैसला न केवल संबंधित नेताओं के लिए, बल्कि चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक नियमों की व्याख्या के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

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