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Mahasamund Ganja Smuggling: छत्तीसगढ़ से दीगर राज्यों में गांजे की तस्करी लगातार एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। साल 2026 की शुरुआत में ही एक बार फिर यह साफ हो गया है कि नशे के सौदागर अपने नेटवर्क को लगातार मजबूत करने में जुटे हुए हैं। बस्तर, रायपुर, धमतरी और महासमुंद जैसे जिलों से सामने आ रहे मामलों ने पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। खासकर वनांचल और सीमावर्ती इलाकों का इस्तेमाल तस्करी के लिए धड़ल्ले से किया जा रहा है।
सोमवार 19 जनवरी को महासमुंद जिले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 4 करोड़ 75 लाख रुपये से अधिक कीमत का गांजा जब्त किया है। महासमुंद पुलिस ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के साथ मिलकर थाना कोमाखान क्षेत्र में यह कार्रवाई की। इस दौरान दो अंतर्राज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया गया, जिनके कब्जे से कुल 950 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ।
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की सख्त कार्रवाई
छत्तीसगढ़ में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स लगातार नशे के कारोबार पर नकेल कसने में जुटी है। इसी अभियान के तहत कोमाखान पुलिस को यह बड़ी सफलता मिली। कार्रवाई के दौरान जिस ट्रक से गांजे की खेप ले जाई जा रही थी, उसे भी जब्त कर लिया गया है। पुलिस के मुताबिक जब्त गांजे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत और भी ज्यादा हो सकती है, जिससे यह साफ होता है कि तस्करी का नेटवर्क कितना बड़ा है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अक्षय भोरजे और शुभम आउटे के रूप में हुई है। शुरुआती पूछताछ में दोनों ने कई अहम जानकारियां दी हैं, जिसके आधार पर पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी हुई है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं।
ओडिशा से महाराष्ट्र तक फैला तस्करी का रूट
महासमुंद पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की जांच में यह बात सामने आई है कि गांजे की यह खेप ओडिशा से लाई गई थी और इसे ट्रक के जरिए महाराष्ट्र पहुंचाया जाना था। छत्तीसगढ़ का इस्तेमाल इस पूरे रूट में ट्रांजिट प्वाइंट के तौर पर किया जा रहा था।
पुलिस आंकड़ों पर नजर डालें तो बीते 15 दिनों में केवल महासमुंद जिले से ही 1831.610 किलोग्राम गांजा जब्त किया जा चुका है, जिसकी कुल कीमत 9 करोड़ 15 लाख 83 हजार रुपये आंकी गई है। यह आंकड़ा बताता है कि तस्करी का खेल कितने बड़े पैमाने पर चल रहा है।
कानून व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती
लगातार हो रही गांजा जब्ती की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि छत्तीसगढ़ में नशे का कारोबार एक बड़ी चुनौती बन चुका है। हालांकि पुलिस और एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की सक्रियता से तस्करों पर दबाव जरूर बढ़ा है, लेकिन पूरी तरह से इस नेटवर्क को तोड़ना अभी भी आसान नहीं है। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में तस्करी से जुड़े हर पहलू की गहन जांच की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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