बिलासपुर में कामवाली बाइयों की हड़ताल से घरों की रसोई ठप: 400 से ज्यादा महिलाओं ने वेतन और छुट्टी समेत इन मांग को लेकर किया प्रदर्शन

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सरकंडा स्थित विजयापुरम इलाके में शनिवार सुबह घरेलू कामकाज पूरी तरह ठप हो गया, जब करीब 400 कामवाली बाइयों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल शुरू कर दी।

Bilaspur Domestic Workers Strike

Bilaspur Domestic Workers Strike: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में शनिवार की सुबह आम दिनों जैसी नहीं रही। सरकंडा थाना क्षेत्र के विजयापुरम इलाके में घरेलू कामकाज उस वक्त पूरी तरह ठप हो गया, जब करीब 400 कामवाली बाइयां एकजुट होकर धरने पर बैठ गईं। अचानक हुई इस हड़ताल से सैकड़ों घरों की दिनचर्या बिगड़ गई और गृहणियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

धरने पर बैठी बाइयों का कहना है कि मौजूदा वेतन उनकी मेहनत के हिसाब से बहुत कम है। रोजाना कई घरों में झाड़ू-पोछा, बर्तन और अन्य घरेलू काम करने के बावजूद उन्हें पर्याप्त मेहनताना नहीं मिल पा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने महीने में कम से कम तीन दिन बिना वेतन कटौती के छुट्टी देने की मांग भी उठाई है। महिलाओं का कहना है कि लगातार काम के चलते उन्हें आराम का समय नहीं मिल पाता।

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रास्ता बंद होने से बढ़ी मुश्किल

हड़ताल की सबसे बड़ी वजह आने-जाने का रास्ता बंद होना बताया जा रहा है। विजयापुरम कॉलोनी के पीछे स्थित अटल आवास में रहने वाली अधिकांश महिलाएं यहां काम करने आती हैं। लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देकर अटल आवास से विजयापुरम को जोड़ने वाला सीधा रास्ता बंद कर दिया गया है।

इस कारण अब बाइयों को रोजाना 4 से 5 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर काम पर पहुंचना पड़ रहा है। महिलाओं का कहना है कि या तो यह रास्ता खोला जाए, या फिर आने-जाने का अलग से भाड़ा दिया जाए।

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आई-कार्ड और सुरक्षा की मांग

कामवाली बाइयों ने अपनी मांगों में सभी के लिए आई-कार्ड बनाने की बात भी रखी है। उनका कहना है कि पहचान पत्र होने से उनकी पहचान और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित होगी। कई बार बिना पहचान के उन्हें सोसायटी में प्रवेश करने में दिक्कत होती है।

शनिवार सुबह विजयापुरम की सोसायटी के बाहर सैकड़ों बाइयां धरने पर बैठ गईं। इसका असर सीधे घरों में दिखा। कई घरों में सुबह की चाय तक नहीं बन पाई, बच्चों का नाश्ता समय पर नहीं हुआ और कामकाजी महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ी।

गृहणियां और कामकाजी महिलाएं परेशान

सोसायटी में रहने वाली महिला वकील नूपुर ने बताया कि उनकी कामवाली बाई बिना बताए नहीं आई और फोन करने पर कॉल भी रिसीव नहीं किया। उन्होंने कहा कि घर का सारा काम छोड़कर कोर्ट जाना उनकी पहली प्राथमिकता होती है, लेकिन बाई के न आने से पूरा शेड्यूल बिगड़ गया। वेतन बढ़ोतरी को लेकर उन्होंने यह भी कहा कि हर घर में अलग-अलग रेट तय हैं और दोनों पक्षों को एक-दूसरे की जरूरत समझनी चाहिए।

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“मांगें पूरी होंगी तभी काम शुरू करेंगे”

धरने में शामिल किरण वर्मा ने बताया कि सोसायटी वालों ने प्रदर्शन खत्म करने को कहा और पुलिस बुलाने की बात भी कही। लेकिन बाइयों ने साफ कर दिया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं होगा, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगी। सुबह से ही विजयापुरम में बाइयों का जमावड़ा लगा रहा।

इस हड़ताल से सबसे ज्यादा परेशानी गृहणियों को हुई है। कई महिलाओं का कहना है कि एक दिन भी बिना कामवाली बाई के घर संभालना मुश्किल हो गया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन, सोसायटी प्रबंधन और कामवाली बाइयों के बीच कब और कैसे समाधान निकलता है।

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