धमतरी में बड़ी नक्सली सफलता: 5 लाख की इनामी महिला कमांडर ने किया सरेंडर, 20 साल बाद छोड़ी बंदूक

छत्तीसगढ़ में 5 लाख की इनामी महिला माओवादी भूमिका उर्फ गीता ने धमतरी पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। दो दशकों तक संगठन में सक्रिय रहने के बाद उसने विचारधारा से मोहभंग और आंतरिक भेदभाव के चलते हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

CG Naxal surrender

CG Naxal surrender

CG Naxal surrender: छत्तीसगढ़ के पुनर्वास नीति में एक बड़ा असर देखने को मिला है। मंगलवार को 5 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली कमांडर भूमिका उर्फ गीता उर्फ सोमारी (37 वर्ष) ने SP ऑफिस पहुंचकर सरेंडर कर दिया। महिला माओवादी ने एसपी सूरज सिंह परिहार के समक्ष मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। वह नगरी एरिया कमेटी की सदस्य और गोबरा एलओएस कमांडर के रूप में पिछले 20 साल से सक्रिय थी। 

संगठन के विचारधारा से मोहभंग

बता दें, भूमिका बीजापुर के ग्राम पुसनार की मूल निवासी है और वह साल 2005 से ही माओवादी संगठन में सक्रिय थी। पुलिस के अनुसार, माओवादी संगठन में लंबे समय रहने के बाद भूमिका के अहसास हुआ कि वहां विचारधारा के नाम पर केवल भेदभाव है। साथ हीं संगठन में महिला नक्सली के साथ दुर्व्यवहार होता था, जिससे परेशान होकर उसे हथियार छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। धमतरी पुलिस द्वारा चलाए जा रहे सिविक एक्शन कार्यक्रमों और नक्सल विरोधी अभियानों ने उसे मुख्यधारा की ओर आकर्षित करने में बड़ी भूमिका निभाई।

प्लाटून सदस्य से कमांडर बनने तक का सफर

भूमिका करीब 20 साल तक माओवादी संगठन से जुड़ी रही। उसने वर्ष 2005 में संगठन में कदम रखा और 2010 तक प्लाटून-01 में सक्रिय रही। इसके बाद वह ओडिशा राज्य कमेटी से जुड़ी और 2011 से 2019 के बीच सीसीएम संग्राम की सुरक्षा टीम में काम करती रही। वर्ष 2019 में उसे सीनापाली एरिया कमेटी में एसीएम बनाया गया। सितंबर 2023 से वह गोबरा एलओएस कमांडर की जिम्मेदारी निभा रही थी। हाल के समय में संगठन में सदस्यों की कमी के कारण वह नगरी और सीतानदी एरिया कमेटी के साथ मिलकर गतिविधियों में शामिल थी।

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कई मुठभेड़ों में रही सक्रिय

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार भूमिका कई बड़ी नक्सली घटनाओं और मुठभेड़ों में शामिल रही है। वर्ष 2010 में ओडिशा के पड़कीपाली इलाके से लेकर हाल ही में धमतरी के मांदागिरी और गरियाबंद के सेमरा जंगल में हुई मुठभेड़ों तक उसकी भूमिका दर्ज की गई है। उसके खिलाफ अलग-अलग थानों में कई गंभीर मामले दर्ज हैं। पुलिस अधिकारियों ने इस आत्मसमर्पण को नक्सल विरोधी अभियान की एक अहम उपलब्धि बताया है।

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पुनर्वास नीति के तहत मिली सहायता

आत्मसमर्पण के बाद राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत भूमिका को 50 हजार रुपये की तत्काल प्रोत्साहन राशि दी गई है। पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार ने कहा कि यह आत्मसमर्पण उन युवाओं के लिए स्पष्ट संदेश है जो भटककर हिंसा के रास्ते पर चले जाते हैं। उन्होंने अन्य माओवादियों से भी हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की है।

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