कांकेर में 77वें गणतंत्र दिवस पर दिखा ऐतिहासिक बदलाव: पहली बार पूर्व नक्सलियों का हॉर्स राइडर्स दल परेड में शामिल, दहशत से सम्मान तक का सफर

कांकेर जिले में 77वां गणतंत्र दिवस समारोह इस बार केवल उत्सव नहीं, बल्कि बदलाव और उम्मीद का प्रतीक बन गया। नरहरदेव स्कूल मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में पहली बार घुड़सवारों का विशेष दल परेड में शामिल हुआ।

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Kanker Republic Day: उत्तर बस्तर के कांकेर जिले में इस वर्ष 77वां गणतंत्र दिवस समारोह पूरे उत्साह और देशभक्ति के माहौल में मनाया गया। नरहरदेव स्कूल मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में बड़ी संख्या में नागरिक, स्कूली बच्चे, अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। चारों ओर देशभक्ति गीतों और जयकारों से माहौल गूंज उठा।

समारोह के मुख्य अतिथि सांसद भोजराज नाग ने ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी। इसके बाद उन्होंने परेड का निरीक्षण किया। परेड में पुलिस बल, होमगार्ड, एनसीसी और स्कूली बच्चों की टुकड़ियों ने अनुशासन और समर्पण के साथ मार्च पास्ट किया।

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पहली बार परेड में शामिल हुआ हॉर्स राइडर्स दल

CG NEWS : गणतंत्र दिवस पर पहली बार परेड में उतरे हॉर्स राइडर्स, 6 सरेंडर नक्सलियों ने दिखाए हैरतअंगेज स्टंट…

इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण हॉर्स राइडर्स का विशेष दल रहा। यह पहली बार था जब कांकेर के गणतंत्र दिवस परेड में घुड़सवारों को शामिल किया गया। इस दल की खास बात यह रही कि इसमें शामिल 6 युवक कभी नक्सली संगठन से जुड़े थे, लेकिन अब उन्होंने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा को अपनाया है।

कभी जंगलों में बंदूक उठाने वाले ये युवा अब घोड़ों पर सवार होकर अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ परेड करते नजर आए। महज 15 दिनों के कठिन प्रशिक्षण में उन्होंने घुड़सवारी सीखी और मैदान पर हैरतअंगेज स्टंट दिखाकर दर्शकों को चकित कर दिया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच इन युवाओं का प्रदर्शन पूरे समारोह की पहचान बन गया।

पूर्व नक्सलियों का भावुक संदेश

स्टंट प्रदर्शन के बाद इन पूर्व नक्सलियों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति ने उन्हें नई जिंदगी दी है। उन्होंने कहा, “मुख्यधारा में लौटकर जो सम्मान और पहचान मिली है, वह जंगल की जिंदगी में कभी नहीं थी।” साथ ही उन्होंने नक्सल संगठन में सक्रिय अपने साथियों से भी हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने की अपील की।

झांकियों में दिखी बस्तर की संस्कृति

परेड के बाद विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुत झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया। आदिवासी विकास विभाग की झांकी में बस्तर की समृद्ध आदिवासी कला, नृत्य और संस्कृति को जीवंत रूप में दिखाया गया। वहीं पुलिस विभाग की झांकी ‘सड़क सुरक्षा’ थीम पर आधारित रही, जिसमें हेलमेट, सीट बेल्ट और यातायात नियमों के पालन का संदेश दिया गया।

समारोह के समापन पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले हॉर्स राइडर्स दल और विभिन्न स्कूलों के बच्चों को पुरस्कृत किया गया। यह क्षण उन युवाओं के लिए खास रहा, जिन्होंने संघर्ष के बाद नया रास्ता चुना और समाज के सामने एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया।

बस्तर में बदलते दौर की झलक

कांकेर का यह गणतंत्र दिवस समारोह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर में शांति, पुनर्वास और भरोसे की वापसी का प्रतीक बन गया। पूर्व नक्सलियों की परेड में भागीदारी ने यह संदेश दिया कि संवाद और अवसर से हिंसा का रास्ता छोड़ा जा सकता है।

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