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Bijapur Republic Day: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के अंदरूनी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 77वें गणतंत्र दिवस पर इतिहास रच दिया गया। माओवादियों के कोर एरिया के रूप में कुख्यात कर्रेगुट्टा हिल्स में अब लोकतंत्र की आवाज बुलंद होती नजर आई। लगभग 5000 फीट ऊंचाई पर स्थित इस दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में स्थापित नवीन सुरक्षा कैम्प में पूरे सम्मान और शान के साथ राष्ट्रध्वज फहराया गया।
जहां चला था महीनों का ऑपरेशन, वहीं मना उत्सव
यह वही इलाका है, जहां नक्सलियों से लोहा लेने के लिए सुरक्षाबलों ने करीब एक माह तक लगातार सघन ऑपरेशन चलाया था। जंगल, पहाड़ और जोखिम भरे हालातों के बीच चले इस अभियान के बाद जब यहां सुरक्षा कैम्प स्थापित हुआ, तो यह क्षेत्र के लिए बड़ा बदलाव साबित हुआ। अब उसी धरती पर गणतंत्र दिवस का उत्सव मनाया जाना लोकतंत्र की मजबूती और शांति की वापसी का प्रतीक बन गया।
नवीन सुरक्षा कैम्प में भव्य ध्वजारोहण
कर्रेगुट्टा हिल्स में स्थापित नवीन सुरक्षा कैम्प में आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम में सुरक्षाबलों के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्रामीण और स्कूली बच्चे भी शामिल हुए। सभी ने एक साथ राष्ट्रध्वज को सलामी दी। तिरंगे के फहराते ही पूरा इलाका देशभक्ति के रंग में रंग गया और ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा।
ग्रामीणों और बच्चों की सक्रिय भागीदारी
इस ऐतिहासिक अवसर पर स्कूली बच्चों और ग्रामीणों ने नवीन सुरक्षा कैम्पों में प्रभात फेरी भी निकाली। हाथों में तिरंगा लिए बच्चे ‘वंदे मातरम’ और ‘जय हिंद’ के नारे लगाते हुए पूरे क्षेत्र में घूमे। कभी लाल आतंक के साये में जीने वाले इन गांवों में यह दृश्य लोगों के लिए भावुक कर देने वाला था।
जिन इलाकों में कुछ समय पहले तक भय, हिंसा और अस्थिरता का माहौल था, वहां अब सुरक्षाबलों की मौजूदगी में शांतिपूर्ण वातावरण देखने को मिला। ग्रामीणों ने सुरक्षाबलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर ध्वजारोहण किया। यह दृश्य इस बात का प्रमाण था कि अब इन क्षेत्रों में भरोसा लौट रहा है और लोग मुख्यधारा से जुड़ने लगे हैं।
बदलते बस्तर की तस्वीर
बीजापुर के अंदरूनी इलाकों में गणतंत्र दिवस का यह आयोजन केवल एक राष्ट्रीय पर्व का उत्सव नहीं था, बल्कि बदलते बस्तर की तस्वीर भी पेश करता है। यह दिखाता है कि जहां कभी बंदूक की आवाज गूंजती थी, वहां अब राष्ट्रगान और देशभक्ति के गीत सुनाई दे रहे हैं।
सुरक्षाबलों की इस पहल ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि लोकतंत्र की जड़ें अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी मजबूत हो रही हैं। कर्रेगुट्टा हिल्स में फहराया गया तिरंगा आने वाले समय में विकास, विश्वास और स्थायी शांति का प्रतीक माना जा रहा है।
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