CG Transfer News: ट्रांफसर आवेदनों की सुनवाई के लिए कमेटी गठित, ACS मनोज पिंगुआ अध्यक्ष

Chhattisgarh Transfer Committee Formed: छत्तीसगढ़ सरकार ने तबादला बैन हटाने के बाद अधिकारियों- कर्मचारियों के ट्रांसफर आवेदनों की सुनवाई के लिए ACS मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की है।

Chhattisgarh Transfer Committee Formed

Chhattisgarh Transfer Committee Formed

Chhattisgarh Transfer Committee Formed: छत्तीसगढ़ में ट्रांसफर से बैन हटने के बाद तबादलों के लिए आवेदन आ रहे हैं। अधिकारियों, कर्मचारियों के ट्रांफसर अभ्यावेदनों की सुनवाई के लिए सरकार ने अपर मुख्य सचिव (ACS) मनोज कुमार पिंगुआ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है। इसका आदेश सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किया है।

GAD का आदेश पढ़ें

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सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश में क्या लिखा ?

सामान्य प्रशासन विभाग के समसंख्यक परिषत्र दिनांक 05.06.2025 द्वारा स्थानातरण नीति वर्ष 2025 जारी कर स्थानांतरण पर प्रतिबंध को शिथिल किया गया है। अर्थात तबादला आदेश जारी करने की प्रक्रिया सावधानी पूर्वक की जाती है। बावजूद इसके ऐसे स्थानांतरण प्रकरणों जिनमें अधिकारियों और कर्मचारियों को यह प्रतीत होता है कि उक्त स्थानांतरण आदेश में स्थानांतरण नीति वर्ष 2025 का उल्लंघन हुआ है। अतः उनके द्वारा उनका स्थानांतरण आदेश के विरुद्ध माननीय छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के समक्ष याचिका दायर की जाती है।
माननीय छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर द्वारा प्रकरण डब्ल्यूपी (एस) क्रमांक 2889/2012 में पारित आदेश दिनांक 01.08.2012 के अनुक्रम में विगत वर्षों के भांति ऐसे स्थानांतरण प्रकरणों के परीक्षणोपरात निराकरण हेतु राज्य शासन एत‌द्वारा निम्नानुसार वरिष्ठ सचिवों की समिति का गठन करता है

1.मनोज कुमार पिंगुआ, अपर मुख्य सचिव ( गृह एवं जेल विभाग)
2. सिद्धार्थ कोमल परदेशी, सचिव ( स्कूल शिक्षा विभाग)
3. भारसाधक सचिव- सदस्य सचिव (सामान्य प्रशासन विभाग)

समिति स्थानांतरण नीति वर्ष 2025 में उल्लेखित प्रधानअनुसार किये गए स्थानांतरण से व्यथित अधिकारी और कर्मचारी द्वारा प्रश्नाधीन स्थानांतरण आदेश के विरुद्ध स्थानांतरण नीति वर्ष 2025 के उल्लंघन के संबंध में स्पष्ट आधारों के स्थानांतरण आदेश जारी होने की तिथि से 15 दिवस के भीतर प्रस्तुत अभ्यावेदन पर ही स्थानांतरण नीति वर्ष 2025 के अंतर्गत विचार करेगी।

उक्त निर्धारित अवधि पश्चात सिर्फ कोर्ट के आदेश के अनुपालन ने याचिकाकर्ताओं द्वारा निर्धारित समयावधि अभ्यावेदन स्वीकार किया जाएगा।

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