CG Vegetable Market Crisis: आलू-प्याज का 30 वर्षों का सबसे बुरा दौर, डिमांड में 60% की गिरावट, कीमतें धड़ाम

CG Vegetable Market Crisis: छत्तीसगढ़ की मंडियों में आलू-प्याज की मांग में 60% तक गिरावट देखने को मिल रही है। 30 साल बाद इतनी बड़ी मंदी देखने को मिली है। जानिए क्या है इसके पीछे की वजह।

CG Vegetable Market Crisis

CG Vegetable Market Crisis

CG Vegetable Market Crisis: देश में महंगाई से जूझ रहे उपभोक्ताओं के लिए अभी राहत की उम्मीद थी, लेकिन दूसरी ओर आलू, प्याज और लहसुन की मांग (demand for potatoes and onions) में 60 फीसदी से ज्यादा की गिरावट ने व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। पिछले तीस वर्षों में ऐसी मंदी (potato onion price crash) पहले कभी नहीं देखी गई।

थोक से रिटेल तक कीमतों में भारी गिरावट

इस समय (CG Vegetable Market Crisis) आलू की थोक दर 12–14 रुपये/किलो है, जबकि रिटेल मार्केट में इसके दाम 20–30 रुपये/किलो तक पहुंच गए हैं। प्याज की थोक दर 8–16 रुपये/किलो है और रिटेल में 20–25 रुपये के बीच मिल रही है। (vegetable wholesale prices collapse) ऐसे हालात पहले नहीं रहे।

आवक में भारी कमी, ट्रैक्स थीं घटकर ट्रकें बन गईं

रायपुर की मंडियों में अब आलू की आवक 25 ट्रक से घटकर 8–10 ट्रक रह गई है और प्याज की आपूर्ति भी 30–35 ट्रक से 20 ट्रक से कम हो गई है। इसका असर पूरे राज्य की मंडियों में देखा जा रहा है। (drop in vegetable arrivals Raipur)

व्यापारी परेशान, कृषि नीति पर उठ रहे सवाल

भनपुरी आलू‑प्याज थोक व्यापारी संघ के अध्यक्ष अजय अग्रवाल का कहना है कि यह मंदी पिछले 30 वर्षों में सबसे गंभीर है। उन्होंने सरकार की कृषि नीतियों (agriculture policy scrutiny) को दोषी ठहराया क्योंकि उचित समर्थन नहीं मिलने से व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

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लोगों की जेब में राहत, लेकिन किसान बुरी तरह प्रभावित

उपभोक्ताओं को सब्जियों की सस्ती दर दिख रही है, पर किसानों और व्यापारियों को नुकसान हो रहा है। फसल उत्पादन बढ़ने पर पूर्व में बढ़ चुके दाम अब वापस नहीं आ रहे, जिससे उनकी आमदनी घट रही है।

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