छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने शिक्षादूत की बेरहमी से हत्या की: पुलिस मुखबिर होने का लगाया आरोप, शिक्षा के लिए जोखिम में जान

Bijapur Shikshadoot Murder: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों ने शिक्षादूत की बेरहमी से हत्या की, पुलिस मुखबिर होने का लगाया आरोप, शिक्षा के लिए जोखिम में जान

Bijapur Shikshadoot Murder

Bijapur Shikshadoot Murder: बीजापुर-सुकमा सीमा पर स्थित सिलगेर गांव में नक्सलियों ने एक बार फिर खौफ का माहौल बना दिया है। बुधवार को नक्सलियों ने शिक्षादूत लक्ष्मण बाडसे (Laxman Badse) की धारदार हथियार से हत्या कर दी। नक्सलियों ने उन पर पुलिस का मुखबिर होने का आरोप लगाया था।

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मृतक की पहचान और पृष्ठभूमि

लक्ष्मण बाडसे भोपालपटनम (Bhopalpatnam) ब्लॉक के पेगड़ापल्ली (Pegadapalli) गांव के रहने वाले थे। वर्तमान में वे मंडेमरका (Mandemarka) में शिक्षादूत के रूप में कार्यरत थे। उनका ससुराल सिलगेर में ही था। बताया जा रहा है कि उन्हें पहले भी नक्सलियों से धमकियां मिल चुकी थीं, लेकिन वे बच्चों को पढ़ाने का काम छोड़ना नहीं चाहते थे।

लगातार निशाने पर आ रहे शिक्षादूत

बीजापुर और सुकमा जैसे नक्सल प्रभावित जिलों में यह पहली घटना नहीं है। अब तक नक्सली 7 शिक्षादूतों की हत्या कर चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नक्सली उन्हें अक्सर पुलिस का सहयोगी बताकर निशाना बनाते हैं, जबकि वे केवल शिक्षा देने का काम करते हैं।

सीमित संसाधनों में शिक्षा दे रहे युवा

फिलहाल सुकमा जिले में 90 और बीजापुर जिले में 191 शिक्षादूत सेवाएं दे रहे हैं। ये सभी स्थानीय युवा हैं, जिन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई की है। सरकार से उन्हें सुकमा में 11 हजार और बीजापुर में 10 हजार रुपए मासिक मानदेय मिलता है।

ये शिक्षादूत पेड़ों के नीचे, मिट्टी की झोपड़ियों या अस्थायी कक्षाओं में बच्चों को पढ़ाते हैं। बेहद कठिन परिस्थितियों और लगातार खतरों के बावजूद वे शिक्षा की ज्योत जलाए हुए हैं।

शिक्षा के हक के लिए जान जोखिम में

ग्रामीण इलाकों में रहने वाले बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी इन शिक्षादूतों पर है। लेकिन नक्सलियों के लगातार हमले उनके जीवन को असुरक्षित बना रहे हैं। स्थानीय लोग मानते हैं कि यदि ऐसे हमले जारी रहे तो दूर-दराज के गांवों में शिक्षा का सपना अधूरा रह जाएगा।

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