जांजगीर-चांपा जिले में दूषित पानी से फैला डायरिया: हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, स्वास्थ्य सचिव से मांगा जवाब

Janjgir Champa Diarrhea Case: जांजगीर-चांपा जिले में दूषित पानी से फैला डायरिया, हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान, स्वास्थ्य सचिव से मांगा जवाब

Janjgir Champa Diarrhea Case

Janjgir Champa Diarrhea Case: छत्तीसगढ़ के खरौद (Kharod) कस्बे में डायरिया (Diarrhea) के तेजी से फैलते मामलों ने एक बार फिर राज्य की पेयजल व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांजगीर-चांपा ज़िले (Janjgir-Champa District) के तिवारीपारा मोहल्ले (Tiwari Para Mohalla) में एक ही हैंडपंप से दूषित पानी पीने के कारण 23 से ज्यादा लोग बीमार हो गए हैं।

इस मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने खुद संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को फटकार लगाई है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव (Health and Family Welfare Secretary) को निर्देश दिया है कि वे व्यक्तिगत शपथपत्र के माध्यम से मामले की विस्तृत जानकारी कोर्ट में पेश करें।

एक ही हैंडपंप से पी रहे थे पानी

स्थानीय निवासियों का कहना है कि पूरा मोहल्ला सिर्फ एक हैंडपंप (Hand Pump) पर निर्भर है। उसी से निकले दूषित पानी के सेवन से लोग डायरिया की चपेट में आ गए। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर घर-घर सर्वे और इलाज शुरू कर दिया है।

प्रशासन ने उस संदिग्ध हैंडपंप को सील कर दिया है। वहीं लोगों को ओआरएस (ORS) और क्लोरीन की गोलियां (Chlorine Tablets) वितरित की जा रही हैं। डॉक्टरों की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और लोगों को उबला हुआ पानी पीने और व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दे रही हैं।

हाईकोर्ट ने पूछा– क्यों नहीं की गई पहले जांच?

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) ने कोर्ट को बताया कि अब विभाग ने आवश्यक कदम उठाए हैं। वहीं कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख आज 23 जुलाई तय की है और तब तक सभी तथ्यों की रिपोर्ट मांगी है।

प्रशासन की सक्रियता के बावजूद लोग डरे हुए

हालांकि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की टीमें तेजी से काम कर रही हैं, फिर भी स्थानीय लोग डरे हुए हैं। कुछ मरीजों को जिला स्वास्थ्य केंद्र (District Health Center) में भर्ती कराया गया है, जबकि कई लोगों का इलाज घर पर ही चल रहा है।

ग्रामीणों की मांग है कि क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था को सुधारने के लिए स्थायी समाधान निकाला जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

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