CG Indravati Water Sharing Controversy: क्‍या इस बार सुलझ पाएगा इंद्रावती जल बंटवारा विवाद? इस वजह से बढ़ी उम्‍मीद

CG Indravati Water Sharing Controversy: क्‍या इस बार सुलझ पाएगा इंद्रावती जल बंटवारा विवाद? इस वजह से बढ़ी उम्‍मीद

CG Indravati Water Sharing Controversy: क्‍या इस बार सुलझ पाएगा इंद्रावती जल बंटवारा विवाद? इस वजह से बढ़ी उम्‍मीद

   हाइलाइट्स

  • चार दशक से पुराना है जल बंटवारा विवाद
  • ओडिशा-सीजी के बीच नहीं सुलझा विवाद
  • अब दोनों राज्‍यों में एक ही पार्टी का शासन

रिपोर्ट: रजत वाजपेयी

CG Indravati Water Sharing Controversy: चार दशक से ज्यादा का वक्त बीत गया लेकिन इंद्रावती जल बंटवारा विवाद अब तक नहीं सुलझा है।

ओडिशा और छत्तीसगढ़ में अलग-अलग पार्टियों की सरकार थी, इसके चलते यह जल बंटवारा विवाद अभी भी जारी है। इस बार बस्‍तर के लोगों की उम्‍मीद जगी है क्‍योंकि केंद्र राज्‍य ओडिशा और छत्‍तीसगढ़ तीनों जगह पर एक ही पार्टी की सरकार है।

इससे इस बार जल बंटवारे के विवाद (CG Indravati Water Sharing Controversy) की समस्‍या का समाधान होते बस्‍तरवासियों को नजर आने लगा है। यदि ये विवाद खत्‍म हो जाता है तो बस्‍तर को भरपूर पानी मिल जाएगा।

   दो समझौते, पर समाधान नहीं

CG Indravati Water Sharing Controversy

इंद्रावती नदी ओडिशा के कालाहांडी से निकली है। इस नदी को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच विवाद (CG Indravati Water Sharing Controversy) 4 दशक पुराना है।

इस विवाद को सुलझाने और दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर 2 समझौते हो चुके हैं। एक अविभाजित मध्यप्रदेश के वक्त और दूसरा छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद।

दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच समझौता हुआ कि सालाना ओडिशा 45 टीएमसी पानी छत्तीसगढ़ के लिए छोड़ेगा, लेकिन ये समझौता सिर्फ फाइलों में ही कैद होकर रह गया।

   अब उम्‍मीद जागी है

इंद्रावती बचाओ आंदोलन प्रमुख सदस्‍य अनिल लुंकड़ का कहना है कि अब जब छत्तीसगढ़ के साथ ओडिशा और केंद्र में भी बीजेपी की सरकार बन गई है।

अब बस्तर के साथ छत्तीसगढ़ की जनता को भी उम्मीद है कि ट्रिपल इंजन की सरकार बनने से मध्यप्रदेश और राजस्थान के जल विवाद (CG Indravati Water Sharing Controversy) की ही तरह ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच का विवाद भी सुलझ जाएगा।

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   ट्रिपल इंजन की सरकार से उम्‍मीद

छत्‍तीसगढ़ सरकार (CG Govt) में वन मंत्री केदार कश्यप का कहना है कि बस्तर संभाग में ये नदी 233 किलोमीटर बहकर बीजापुर के भद्रकाली में महाराष्ट्र और तेलंगाना की सीमा पर गोदावरी नदी में मिल जाती है।

खास बात ये है कि पहले जो जोरा नाला इंद्रावती का सहायक था, अब वह पूरी नदी को ही लील रहा है।

अगर ओडिशा (Odhisha Govt) से पानी नहीं छोड़ा गया तो न सिर्फ नदी के आस-पास के गांव की खेती बर्बाद हो जाएगी, बल्कि विश्व में प्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात पानी के बिना अपना सौंदर्य खो देगा।

उम्मीद है कि ट्रिपल इंजन सरकार जल्द ही इस समस्या का हल निकालकर लोगों को राहत देगी।

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