छत्तीसगढ़ में दो CMO समेत पांच निलंबित: भ्रष्टाचार मामले में राज्य सरकार ने की बड़ी कार्रवाई, जानें पूरा मामला

Chhattisgarh Five Officers Suspended: छत्तीसगढ़ में दो CMO समेत पांच निलंबित: भ्रष्टाचार मामले में राज्य सरकार ने की बड़ी कार्रवाई, जानें पूरा मामला

Chhattisgarh Five Officers Suspended

Chhattisgarh Five Officers Suspended: कांग्रेस शासनकाल के दौरान डोंगरगढ़ नगर पालिका परिषद में हुए करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार के मामलों में राज्य शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। इन मामलों में शामिल दो तत्कालीन मुख्य नगर पंचायत अधिकारियों सहित पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।

निलंबित अधिकारियों में दो सब इंजीनियर और एक एकाउंटेंट भी शामिल हैं। सभी को नगरीय प्रशासन विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय दुर्ग में अटैच कर दिया गया है।

आर्थिक अनियमितता का दोषी पाते हुए किया गया निलंबित 

अवर सचिव अजय तिर्की द्वारा जारी आदेश के तहत, फरवरी 2021 से सितंबर 2022 तक डोंगरगढ़ नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी यमन देवांगन को आर्थिक अनियमितता का दोषी पाते हुए निलंबित किया गया है।

वर्तमान में वे नगर पंचायत इंदौरी (कवर्धा) में मुख्य नगर पालिका अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। वहीं, सितंबर 2022 से अगस्त 2023 तक डोंगरगढ़ पालिका में सीएमओ रहे प्रमोद शुक्ला को भी सस्पेंड किया गया है, और वे अब खैरागढ़ नगर पालिका में सहायक राजस्व निरीक्षक के पद पर तैनात हैं।

इन अधिकारियों पर भी गिरी गाज

इसके अलावा, उप अभियंता रितेश स्थापक, किशोर ठाकुर और लेखापाल दीपा भिवगढ़े को भी निलंबित किया गया है। रितेश स्थापक और दीपा भिवगढ़े डोंगरगढ़ पालिका में तैनात हैं, जबकि किशोर ठाकुर नगर पंचायत छुरिया में उप अभियंता के रूप में कार्यरत हैं।

जांच के दौरान एक और तत्कालीन सीएमओ कुलदीप झा भी आर्थिक गड़बड़ी में दोषी पाए गए हैं, और वे खैरागढ़ पालिका में भ्रष्टाचार के मामले में निलंबित हैं। इसके अलावा, प्लेसमेंट कर्मचारी जयेस सहारे को बर्खास्त करने का आदेश दिया गया है।

उप मुख्यमंत्री अरूण साव ने दिए थे जांच के आदेश 

इस मामले की शिकायत इस वर्ष फरवरी में दर्ज हुई थी। अप्रैल में विभागीय मंत्री और उप मुख्यमंत्री अरूण साव ने नगरीय प्रशासन विभाग के संचालक को जांच के आदेश दिए थे। जून में दो सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया और 9 अक्टूबर को टीम ने निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा के साथ रिपोर्ट अवर सचिव को भेजी।

लगभग दो महीने बाद 9 दिसंबर को फाइल विभागीय मंत्री तक पहुंची, जिन्होंने तुरंत कार्रवाई का अनुमोदन किया और अगले दिन आदेश जारी कर दिया।

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