CG Elections 2023: नक्सलियों के बाद ग्रामीणों ने किया चुनाव का बहिष्कार, कहा- नेताओं पर नहीं है भरोसा

छत्‍तीसगढ़ में इस बार नक्सलियों की सक्रियता को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि बीजापुर में मतदान काफी चुनौतीपूर्ण भरा हो सकता है।

CG Elections 2023: नक्सलियों के बाद ग्रामीणों ने किया चुनाव का बहिष्कार, कहा- नेताओं पर नहीं है भरोसा

बीजापुर। CG Elections 2023: छत्‍तीसगढ़ में 7 नवंबर को प्रथम चरण के लिए मतदान होना है, लेकिन इस बार नक्सलियों की सक्रियता को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि बीजापुर में मतदान काफी चुनौतीपूर्ण भरा हो सकता है।

नक्सलियों ने प्रेस नोट जारी करने के साथ ही जिले के कई मार्गों पर पर्चे फेंककर चुनाव का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है।

हजारों ग्रामीण हुए लामबंद

इधर, दूसरी ओर गंगालूर क्षेत्र के हजारों ग्रामीण लामबंद हो गए और विधानसभा चुनाव का बहिष्‍कार करने का ऐलान कर रहे हैं।

ग्रामीण वादाखिलाफी और पिछड़ेपन को लेकर भाजपा कांग्रेस को मार भगाओ के नारे को बुलंद कर रहे हैं।

ग्रामीणों कहना है कि अब उन्हें नेताओं और राजनीतिक पार्टियों पर कोई भरोसा नहीं रहा है।

12 गांवों के लोगों ने किया बहिष्कार

रविवार की सुबह गंगालूर के सावनार इलाके में चुनाव बहिष्कार को लेकर करीब 12 गांवों के सैकड़ों ग्रामीण एकत्रित हुए थे।

जिसकी सूचना मिलते ही बंसल न्‍यूज की टीम करीब 40 किलोमीटर का सफर तय कर उस जगह पहुंची जहां बड़ी संख्या में आदिवासी पहुंचे थे।

विकास के नाम पर छल रहे नेता

चुनाव बहिष्कार करने पहुंचे ग्रामीणों का कहना था कि वे इस बार मतदान नही करेंगे, क्योंकि भाजपा और कांग्रेस के चुने हुए विधायक उन्हें करीब 24 साल से विकास के नाम पर छलते आ रहे है।

उन्‍होने कहा कि 15 साल भाजपा ने शासन किया और 5 साल कांग्रेस ने, लेकिन आज तक उनकी मांगे पूरी नहीं की गई और गांव में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार नहीं हुआ है।

मांगें पूरी नहीं होने से नाराज

ग्रामीणों को लगातार गांव में पानी,बिजली,स्कूल आश्रम, आंगनबाड़ी, अस्पताल और सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे हैं।

लेकिन आज तक उनकी मांगों को पूरी नहीं किया गया है। जिससे अब उन्हें राजनीतिक पार्टियों पर कोई भरेसा नहीं है।

मूलभूत सुविधाओं से बंचित हैं गांव

बता दे कि गंगालूर क्षेत्र के करीब 40 से अधिक गांव विकास की धुरी से कोसों दूर है। इन गांवों में 1998 से लेकर आज तक विकास के नाम पर मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंच पाई है।

इसी वजह से ग्रामीण सरकार और प्रशासन से नाराज हैं, हालांकि अब देखना होगा कि 7 नवम्बर को होने वाले मतदान में ग्रामीणों की नाराजनी का क्‍या परिणाम होता है।

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