Chhath Puja 2022 : छठ पर्व का दूसरा दिन आज, इस खास प्रसाद के बिना अधूरा माना जाता है दूसरा दिन

Chhath Puja 2022 : छठ पर्व का दूसरा दिन आज, इस खास प्रसाद के बिना अधूरा माना जाता है दूसरा दिन

नई दिल्ली। Chhath Puja 2022 : पूरे देश में छठ पूजा का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा है। जगह—जगह पूजा के लिए घाट बनाए गए हैं। छठ पर्व की शुरूआत शुक्रवार को हो चुकी है। शनिवार यानि आज दूसरे दिन खाय का दिन होता है। इसी तरह बिलासपुर में भी सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा का शुभारंभ हो गया है। नहाय-खाय और अरपा मैय्या की महाआरती के साथ शुरू हो गया है। 4 दिनों तक चलने वाले छठ पर्व का व्रत काफी कठिन होता है। क्योंकि इस दौरान व्रत करने वाले को लगभग 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखना होता है।

29 अक्टूबर 2022 को खरना – Chhath Puja 2022
छठ महापर्व के दूसरे दिन यानि 29 अक्टूबर को यानि आज खरना होगा। इसमें महिलाएं गुड़ की खीर को प्रसाद के रूप में बनाकर रात में ग्रहण करती हैं। इसी को प्रसाद रूप में बांटा जाता है। इसी के बाद से 36 घंटे के इस व्रत की शुरूआत होती है।

30 अक्टूबर 2022 को होगा छठ पूजा का पहला अर्घ्य Chhath Puja 2022
आपको बता दें छठ पूजा के तीसरे दिन जब सूर्यास्त होता है तब डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं और पुरूष व्रती महिला और पुरुष नदी, तालाब या कुंड में जाकर पानी में खड़े होकर अर्घ्य देती हैं।

ये रहेगा सूर्यास्त का समय:. Chhath Puja 2022
शाम 5ः37 मिनट

31 अक्टूबर 2022 को इतने बजे होगा सुबह का अर्घ्य Chhath Puja 2022
आपको बता दें चौथे दिन व्रती पानी में खड़े होकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता हैण् इसके बाद छठ पूजा का समापन होता हैण् फिर व्रत का पारण किया जाता है।

सूर्योदय समय. सुबह 6ः13 मिनट Chhath Puja 2022

36 घंटे के इस कठिन व्रत की समाप्ति व्रत के पारण के साथ होगी। व्रती महिलाएं और पुरुष पूरा अर्चना के बाद पूरे विधि-विधान के साथ अपना व्रत खोलेंगे।

छठ पूजा के दौरान क्या करें –

  • छठ पूजा का पहला दिन नहाय खाय है, घर की साफ.सफाई कर स्नान करें और फिर भोजन तैयार करें।
  • रसियाव में दूसरे दिन रोटी होती है। शाम को रसियाव में गुड़ से बनी खीर को फल और चपाती के साथ खाया जा सकता है।
  • तीसरे दिन संध्या अर्घ्य है, बांस की टोकरी में फल, ठेकुआ, चावल के लड्डू आदि लेकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
  • सूर्य देव को दूध और जल अर्पित करके प्रसाद से भरे स्नूप से छठी मैया की पूजा करें।
  • रात्रि में व्रत कथा सुनें और धार्मिक गीत गाएं।
  • चौथे दिन उषा अर्घ्य नदी तट पर उगते सूर्य को अर्घ्य देना है।
  • पूजा के बाद शरबत पीकर और प्रसाद खाकर व्रत का समापन करें।

इन चीजों का रखें ध्यान –

घर की सफाई और स्नान करने से पहले छठ पूजा की तैयारी न करें।
छठ पूजा के दिनों में लहसुनए प्याज और मांसाहारी भोजन का प्रयोग न करें।
प्रसाद में साधारण नमक का प्रयोग न करें।
देवता को प्रसाद चढ़ाने से पहले उसका सेवन न करेंए बच्चों को भी नहीं देना चाहिए।
बांस की पुरानी या फटी हुई टोकरी का प्रयोग न करें।
किसी से नाराज न हों क्योंकि यह त्योहार परिवार और बच्चों की शांति, समृद्धि और भलाई के लिए आशीर्वाद प्राप्त करने की मान्यता के साथ विनम्रता और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

जगह—जगह बने घाट —
छठ पूजा को लेकर राजधानी भोपाल में जगह—जगह कुंड बनाए जा रहे हैं। शहर के बागसेवनिया, स्वामी विवेकानंद रोड के पास, लहारपुर रोड, अशोका गार्डन, विवेकानंद पार्क, 5 नंबर, शीतल दास की बगिया कटारा हिल्स आदि स्थानों पर जल कुंड बनाए जाते हैं। जहां व्रत रखने वाले महिला पुरूष जाकर अर्घ दे पाएंगे।

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