Chhath Festival 2023: पीथमपुर में छठ के पहले दिन महिलाओं ने रखा व्रत, तालाबों के किनारे लगीं लाइटें और पंडाल

इंदौर। लोक आस्था का पर्व कहे जाने वाले छठ महापर्व की तैयारियां मप्र में भी चल रही है। प्रदेश के इंदौर जिले में स्थित औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर

Chhath Festival 2023: पीथमपुर में छठ के पहले दिन महिलाओं ने रखा व्रत, तालाबों के किनारे लगीं लाइटें और पंडाल

इंदौर। लोक आस्था का पर्व कहे जाने वाले छठ महापर्व की तैयारियां मप्र में भी चल रही है। प्रदेश के इंदौर जिले में स्थित औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर लोगों इसकी तैयारी में जुटे हैं। यहां पर लोग अपने-अनपे निसाव स्थानों में साफ-सफाई का काम कर रहे हैं।

लोगों में छठ को लेकर उत्साह

बता दें कि पीथमपुर में बड़ी संख्या में बिहार के लोग रहते हैं और ये लोग प्रत्येक वर्ष ही छठ को बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। इस बार भी यहां पर लोगों में छठ को लेकर उत्साह है।

संजय जलाशय तालाब की व्यवस्थाएं

पीथमपुर में स्थित संजय जलाशय तालाब और बगदून तालाब पर नगरीय प्रशासन द्वारा विशेष व्यवस्था की गई है। ताकि लोग यहां पर छठ की पूजा पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न कर सकें।

नपा अध्यक्ष प्रतिनिधि ने दी जानकारी

इस दौरान छठ महापर्व को लेकर क्या-क्या तैयारियां हुईं इस बारे में हमें नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि सुरेश पटेल ने बताया है उन्होंने कहा कि छठ महापर्व के लिए नगर के तालाबों पर लाइटें, और टेंट लगाकर पंडाल बनाए गए हैं।

साथ ही यहां पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन द्वारा पुलिस सिपाहियों की भी तैनाती की गई है। ताकि किसी प्रकार की आसुविधा न हो और स्थानीय रहवासी धूम-धाम से छठ महापर्व मना सकें।

महिलाएं तीन दिनों तक रहती हैं व्रत

बता दें कि आज से छठ महापर्व की शुरुआत हो चुकी है। मान्यता के अनुसार इस त्योहार में महिलाएं तीन दिनों तक व्रत धारण करती हैं। जिसमें पहले दिन की शुरुआत नहाए खाए के साथ होती है। इस दिन व्रत धारण करने वाली महिलाएं सात्विक भोजन करती हैं।

इस तरह मनाया जाता है महापर्व

यह त्योहार मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान व्रत धारण किए महिलाएं उगते और ढलते सूर्य की पूजा कर उसे अर्घ्य देती हैं। साथ ही 36 घंटे का उपवास रख छठी मईयां की पूजा करती हैं।

चार दिवसीय चलने वाले इस पर्व के दौरान लोग अपने-अपने घरों में छठ के भजन बजाते हैं। प्रसाद के रुप में ठेकुआ बनाया जाता है, तरह-तरह के फल चढ़ाए जाते हैं और पूरे इलाके में सजावट भी की जाती हैं।

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