Chaudhary Charan Singh: कहानी चौधरी चरण सिंह की…भारत रत्न बन गया झोपड़ी में जन्मा गुदड़ी का लाल

Chaudhary Charan Singh: पूर्व-प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह (Chaudhary Charan Singh) के लिए भारत रत्न की घोषणा की गई है।

Chaudhary Charan Singh: कहानी चौधरी चरण सिंह की…भारत रत्न बन गया झोपड़ी में जन्मा गुदड़ी का लाल

Chaudhary Charan Singh: पूर्व-प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह (Chaudhary Charan Singh) के लिए भारत रत्न की घोषणा की गई है। चरण सिंह को भारत के बड़े किसान नेताओं में गिना जाता है। वो भारत के पांचवें प्रधानमंत्री रहे।

दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और एक बार 170 दिनों के लिए भारत के प्रधानमंत्री रहे। पिछले कई सालों से राष्ट्रीय लोकदल (RLD) की तरफ से ऐसी मांग उठाई जा रही थी।

   चौधरी चरण सिंह के जीवन पर एक नजर

चौधरी चरण सिंह का जन्म 23 दिसंबर 1902 में हुआ था। वह उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के नूरपुर में एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में जन्में थे। 28 जुलाई 1979 से 14 जनवरी 1980 तक वह भारत के पांचवें प्रधानमंत्री रहे।

पिता मीर सिंह, स्वयं खेती करने वाले काश्तकार किसान थे और उनकी मां नेत्रा कौर थीं। चरण सिंह ने अपनी स्कूली शिक्षा जानी खुर्द गांव में की। उन्होंने 1919 में गवर्नमेंट हाई स्कूल से मैट्रिकुलेशन पूरा किया।

1923 में, उन्होंने आगरा कॉलेज से बीएससी और 1925 में इतिहास में एमए पूरा किया। इसके बाद उन्होंने कानून की भी पढ़ाई की। गाजियाबाद में सिविल लॉ की प्रैक्टिस भी की।

   बापू के सच्चे अनुयायी थे चौधरी साहब

बापू के आह्वान पर 1930 में नमक बनाया। 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ों आंदोलन में भाग लेने पर जिला प्रशासन मेरठ ने उन्हें देखते ही गोली मारने का आदेश दिया था। वे सच्चे राष्ट्रभक्त थे और भारत मां को अंग्रेजों से आजादी दिलाने को जेल की सजा तक काटी थी।

   कैसे बने देश के सबसे बड़े किसान नेता

देश की आजादी के बाद किसानों के हित में जो सबसे बड़ा काम हुआ वह ये था कि गरीब किसानों को जमींदारों के शोषण से मुक्ति दिलाकर उन्हें भूमीधर बनाया गया। इसके पीछे सिर्फ और सिर्फ चौधर चरण सिंह का योगदान था।

उन्होंने भूमी सुधार एंव जमींदारी उन्मूलन कानून बनाकर ऐसा सराहनीय काम किया जिसकी सराहना देश में ही नहीं विदेशों में भी होती है। चौधरी चरण सिंह के इस काम के बदौलत जमींदारों के शोषण से मुक्त होकर किसान भूमीधर बन गए।

जब चौधरी चरण सिंह जी के पास कृषि विभाग था, तब आयोग ने निर्देश दिया था कि जिन जमींदारों के पास खुद के काश्त के लिए जमीन नहीं है वे अपने आसामियों से 30-60 फिसदी भूमी लेने का अधिकार मान लें।

चौधरी चरण सिंह के हस्तक्षेप से यह निर्णय UP में नहीं माना गया। लेकिन दूसरे राज्यों में इसकी आड़ में गरीब किसानों से उनकी भूमी छीन ली गई। इसके बाद 1956 में चौधरी चरण सिंह की प्रेरणा से जमींदारी उन्मूलन एक्ट में संशोधन किया गया और कहा गया कि कोई भी किसान भूमी से वंचित नहीं किया जाएगा।

जिसका किसी भी रूप में जमीन पर कब्जा हो वह जमीन उसकी होगी। उनके इस निर्णय से देश के गरीब किसानों के पास खेती करने के लिए उनकी खुद की जमीन हुई।

   किसानों को बना गए जमींदार

चौधरी साहब ने किसानों के कर्ज माफी बिल पास कराया। जमींदारी उन्मूलन, भूमि सुधार अधिनियम लागू करने, किसानों को पटवारी राज से मुक्ति दिलाने, चकबंदी अधिनियम पारित कराने, फसल उपज बढ़ाने को मिट्टी परीक्षण, कृषि को आयकर से बाहर रखने, नहर पटरियों पर चलने पर जुर्माना लगाने के ब्रिटिश काल कानून खत्म कराने जोत-बही दिलाने, कृषि उपज पर अंतरराज्यीय आवाजाही पर लगी रोक हटाने जैसे बेमिसाल काम किए थे।

   हर ओर जश्न

पीएम नरेंद्र मोदी ने जैसे ही चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने का ऐलान किया वैसे ही बागपत में हर और जश्न का माहौल बन गया। किसानों की खुशी छुपाए नहीं छुप रहीं थी। हर कोई इसके लिए मोदी जी का आभार व्यक्त करता दिखा।

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