Chandrayaan-3: Chandrayaan-3 ने पार किया अपने रास्ते का चौथा पड़ाव, जानें ISRO के मून मिशन का लेटेस्ट अपडेट

बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने को ‘चंद्रयान-3’ को चंद्रमा की कक्षा में ऊपर उठाने की चौथी कवायद सफलतापूर्वक पूरी की।

Chandrayaan-3: Chandrayaan-3 ने पार किया अपने रास्ते का चौथा पड़ाव, जानें ISRO के मून मिशन का लेटेस्ट अपडेट

 बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बृहस्पतिवार को ‘चंद्रयान-3’ को चंद्रमा की कक्षा में ऊपर उठाने की चौथी कवायद सफलतापूर्वक पूरी की। यह कार्य यहां इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी) से किया गया।

अंतरिक्ष एजेंसी ने यहां कहा कि इस तरह की अगली कवायद 25 जुलाई को अपराह्न दो और तीन बजे के बीच किए जाने की योजना है। इसने कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय चंद्रमा दिवस के अवसर पर चंद्रयान-3 को चंद्रमा के और करीब पहुंचा दिया है। चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को प्रक्षेपित किया गया था।

इसरो प्रमुख सोमनाथ एस. ने इससे पहले कहा था, ‘‘...अंतरिक्ष यान चंद्रमा के सफर पर है। अगले कुछ दिनों में यह (लैंडर को चंद्रमा की सतह पर उतारने का कार्य) कर दिखाएगा।’’ उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं जागरूकता प्रशिक्षण (स्टार्ट) कार्यक्रम

2023 के उद्घाटन भाषण में यह बात की। उन्होंने कहा, ‘‘मैं आश्वस्त हूं कि जहां तक विज्ञान की बात है, आप इस (चंद्रयान-3) मिशन के जरिये कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करेंगे।’’

चंद्रयान-3 के कुल पांच इंजेक्शन ऑर्बिट

चंद्रयान-3 अभी पृथ्वी की कक्षा में चक्कर काट रहा है। मंगलवार को इसे धरती के तीसरे ऑर्बिट में भेजा गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) ने यह जानकारी ट्वीट की। पृथ्वी की कक्षा में चंद्रयान-3 के कुल पांच इंजेक्शन ऑर्बिट हैं। पांचों की

फायरिंग पूरी होने के बाद चंद्रयान-3 पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकल जाएगा। इसरो वैज्ञानिकों के अनुसार, यह प्रक्रिया 31 जुलाई और 1 अगस्त की मध्यरात्रि को होगी। धरती से चांद के बीच की दूरी 3.83 लाख किलोमीटर है। चंद्रयान-3 इस दूरी को करीब 42

दिन में पूरा करेगा। वैसे तो यह दूरी सिर्फ चार दिन में पूरी हो सकती है। NASA अपने स्पेसशिप को चंद्रमा पर चार दिन से हफ्ताभर के अंदर पहुंचा देता है। भारत इसके बजाए 40-42 दिन लेता है। इसके पीछे वजह यह है कि धरती के चारों तरफ घुमाकर

अंतरिक्ष यान को गहरे स्पेस में भेजने की प्रक्रिया सस्ती पड़ती है। NASA की तुलना में ISRO के प्रोजेक्ट सस्ते होते हैं। ISRO के पास अभी NASA की तरह बड़े और ताकतवर रॉकेट नहीं हैं जो चंद्रयान-3 को सीधे चांद के ऑर्बिट में भेज सके।

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