Champai Soren: हेमंत सोरेन ने दिया इस्तीफा, चंपई सोरेन होंगे झारखंड के नए सीएम, जाने इनके बारे में

Champai Soren: ईडी ने बुधवार झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन (Hemant Soren) को अरेस्ट कर लिया। अब झारखंड के नए सीएम मंत्री चंपई सोरेन होंगे।

Champai Soren: हेमंत सोरेन ने दिया इस्तीफा, चंपई सोरेन होंगे झारखंड के नए सीएम, जाने इनके बारे में

हाइलाइट्स

  • जमीन घोटाले में हेमंत सोरेन अरेस्ट
  • ईडी ने पूछताछ के बाद लिया फैसला
  • चंपई सोरेन होंगे राज्य के नए सीएम

Champai Soren: ईडी ने बुधवार झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन (Hemant Soren) को अरेस्ट कर लिया। अब झारखंड के नए सीएम मंत्री चंपई सोरेन होंगे। जमीन घोटाले में घिरे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ईडी की पूछताछ के बाद इस्तीफा दे दिया है। चंपई सोरेन (Champai Soren) को सीएम हेमंत सोरेन का करीबी माना जाता है।

कौन हैं चंपई सोरेन?

-चंपई सोरेन सरायकेला सीट से चुनाव जीते थे। वे हेमंत सोरेन की कैबिनेट में परिवहन, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री हैं।

-सरायकेला सीट से चंपई सोरेन लगातार 2005, 2009 और 2014 तीन बार चुनाव जीते हैं।

-इसके अलावा चंपई सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के उपाध्यक्ष की भी जिम्मेदारी है। शिबू सोरेन के करीबी रहे चंपई सोरेन कोल्हान क्षेत्र में ‘टाइगर’ के नाम से मशहूर हैं।

-चंपई सोरोन सरायकेला-खरसावां जिले के निवासी है। 10वीं तक सरकारी स्कूल से पढ़ाई की। कम उम्र में ही मानको से हुई शादी हो गई।

-चंपई के 4 बेटे और 3 बेटियां हैं। बीजेपी की मुंडा की सरकार में भी वे कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। 11 सितंबर 2010 से 18 जनवरी 2013 तक मंत्री रहे थे।

-हेमंत सोरेन सरकार में भी कैबिनेट मंत्री बने। इसके बाद चंपई दूसरी बार 2019 में फिर से हेमंत सरकार में मंत्री बने।

इस केस में हुई हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी

पूर्व सीएम हेमंत सोरेन को ईडी की तरफ से 10 नोटिस जारी किए जा चुके हैं। उन पर अधैव रुप से जमीन पर कब्जा करने के आरोप लगे हैं। इसी सिलसिले में उनसे पूछताछ हो रही है और इसी केस में पूर्व सीएम हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया गया है।

इस केस के बारे में हेमंत सोरने ने ईडी को लिखे लेटर में कहा है कि संबंधित जमीन से उनका कोई लेना देना नहीं है। ये जमीन विशिष्ट प्रकृति वाली आदिवासी भूमि है। इसलिए इस जमीन को खरीदी या बेचा नहीं जा सकता है। लेटर में कहा गया है कि जमीन पर पिछले पांच दशकों से एक आदिवासी पाहन (पुजारी) परिवार का स्वामित्व है।

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