Chaitra Navratri Day 8 Durga Ashtami 2022 : नवरात्री का खास दिन, दुर्गा अष्टमी और संधि पूजा, जानिये क्यों है विशेष

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नई दिल्ली। 13 अक्टूबर को Chaitra Navratri Day 8 Durga Ashtami 2022 नवरात्री के आठवें दिन मां महागौरी का पूजन किया जाएगा। नवरात्रि या दुर्गोत्सव के आठवां दिन दुर्गाष्टमी के रूप में जाना जाता है। मान्यता अनुसार यह दिन सबसे शुभ माना जाता है। इसे महा अष्टमी भी कहते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इस दिन लोग अपनी कुल देवी की पूजा करते है। इस बार शारदीय नवरात्री की अष्टमी तिथि 9 अप्रैल को मनाई जाएगी। आखिर क्यों है इस दिन की महत्ता। आइए पंडित राम गोविंद शास्त्री से जानते हैं इससे संबंधित कुछ खास बातें।

वंश वृद्धि के लिए होगी कुल देवी की पूजा
दुर्गाष्टमी पर कई लोग कुल देवी का पूजन करते हैं। सबकी अपनी परंपरा अनुसार सप्तमी, अष्टमी और नवंमी पर भी होता है लेकिन अधिकतर घरों में अष्टमी पूजन किया जाता है। पंडित राम गोविन्द शास्त्री के अनुसार कुल देवी वंश को आगे बढ़ाने वाली होती हैं। इसलिए इस वंश वृद्धि घर के कुल की सलामती के लिए कुल देवी का पूजन किया जाता है।

यह रही दुर्गा अष्टमी की कथा
कथा अनुसार दो राक्षसों शुंभ और निशुंभ द्वारा देवताओं को हराए जानें के बाद देवलोक पर आक्रमण कर दिया गया। इसके बाद चंड व मुंड सेनापतियों को भेजा गया। तब इसी दिन यानी अष्टमी पर इस दौरान देवताओं की प्रार्थना पर मां पार्वती द्वारा देवी चंडी की रचना की गई। तब मां चंडी ने चंड और मुंड का वध किया। इसी दौरान मां पार्वत द्वारा चंडी देवी को चामुंडा नाम दिया गया।

इन शक्तियों की होती है पूजा
महाअष्टमी पूजन का हमारे धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन मां के 64 योगिनियों, मां के 8 रूपों यानि मां की अष्ट शक्तियों की पूजा की जाती है। मां के विभिन्न रूपों में मां की विभिन्न शक्तियाँ का स्वरूप झलकता है। इस दौरान मां ब्राह्मी, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वारही, नरसिंही, इंद्राणी और चामुंडा आठ शक्तियों की पूजा की जाती है।

संधि पूजा का है खास महत्व
अष्टमी पूजन पर संधि पूजा का विशेष महत्व है। संधि जैसे नाम से ही स्पष्ट है जब दो तिथियों का मिलन होता है। उसे संधि कहते हैं। इसी तरह जब अष्टमी तिथि समाप्त होती है और नवमी तिथि शुरू होती है। उस समय को संधि पूजा कहते हैं। इसी समय पर संधि पूजा की जाती है। ये पूजा इसलिए खास मानी जाती है कि इस संधि के दौरान ही देवी चामुंडा माता ने चंड और मुंड राक्षसों का वध किया था।

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