सुकमा तेंदूपत्ता बोनस घोटाला: DFO निलंबित, अब ACB-EOW की टीम खंगाल रही फाइलें, CPI ने बताया राजनीतिक प्रतिशोध

Sukma Tendu Leaves Scam: सुकमा तेंदूपत्ता बोनस घोटाला, DFO निलंबित, अब ACB-EOW की टीम खंगाल रही फाइलें, CPI ने बताया राजनीतिक प्रतिशोध

Tendupatta-Bonus

हाइलाइट्स

  • सुकमा में तेंदूपत्ता बोनस वितरण में 7 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा
  • सरकार ने DFO अशोक पटेल को किया निलंबित, ACB-EOW की छापेमारी शुरू
  • CPI नेता मनीष कुंजाम ने इसे बताया है राजनीतिक प्रतिशोध 

Sukma Tendu Leaves Scam: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले (Sukma District) में तेंदूपत्ता बोनस वितरण (Tendu Leaves Bonus Distribution) में सामने आए 7 करोड़ रुपये के घोटाले (7 Crore Rupees Scam) ने राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में उथल-पुथल मचा दी है।

इस घोटाले को लेकर सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वन मंडल अधिकारी (DFO) अशोक कुमार पटेल (Ashok Kumar Patel) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

ACB-EOW की टीमें जांच में जुटीं

EOW-ACB ने बढ़ाया जांच का दायरा, इन IAS अधिकारियों पर है जांच की

DFO के निलंबन के साथ ही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की संयुक्त टीमें जांच में जुट गई हैं। पहले चरण की छापेमारी में CPI नेता मनीष कुंजाम (Manish Kunjam) समेत सात ठिकानों पर छापे मारे गए, जहां एक वन विभाग प्रबंधक के घर से लाखों रुपये की नकदी बरामद हुई।

अब दूसरे चरण की छापेमारी दोरनापाल (Dornapal) में 3, कोन्टा (Konta) में 2, और सुकमा व गादीरास (Gadiras) में 1-1 स्थान पर की गई। खासकर वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के आवासों को निशाना बनाया गया है। इन स्थानों से दस्तावेज जब्त किए गए हैं और कर्मचारियों से पूछताछ जारी है।

यह पूरा अभियान राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित: कुंजाम

[caption id="" align="alignnone" width="603"]publive-image CPI नेता मनीष कुंजाम[/caption]

इस कार्रवाई के बीच CPI नेता मनीष कुंजाम ने राज्य सरकार और जांच एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह पूरा अभियान राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। उन्होंने दावा किया कि यह सिर्फ विपक्ष की आवाज़ दबाने और जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश है।

जानकारी के अनुसार, तेंदूपत्ता संग्राहकों को दिए जाने वाले बोनस में कागज़ों पर राशि वितरण दिखाया गया, लेकिन हकीकत में पैसा मजदूरों तक नहीं पहुंचा।

प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि राशि का गबन (Embezzlement) सुनियोजित तरीके से किया गया, जिसमें वन विभाग के कई अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।

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