CG RTE Admission:छत्तीसगढ में इस दिन से शुरू होंगे आवेदन, 1500 सीटों पर बच्चों को मिलेगा निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश

Chhattisgarh (CG) RTE Admission 2025: छत्तीसगढ़ में RTE के तहत 1 जुलाई से दूसरा चरण शुरू हो रहा है। बिलासपुर में 1500 सीटों पर नर्सरी व पहली कक्षा में नि:शुल्क प्रवेश मिलेगा। आवेदन की अंतिम तिथि 12 जुलाई है, लॉटरी 22-23 जुलाई को निकाली जाएगी, और 31 जुलाई तक होगा दाखिला।

CG RTE Admission 2025 Bilaspur

CG RTE Admission 2025 Bilaspur

CG RTE Admission 2025 Bilaspur: छत्तीसगढ़ के हजारों परिवारों के लिए राहत की खबर है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2025 के तहत निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश की प्रक्रिया 1 जुलाई से दोबारा शुरू हो रही है। इस बार बिलासपुर जिले में 1500 सीटें उपलब्ध कराई गई हैं, जिन पर योग्य बच्चों को प्रवेश मिलेगा। यह दूसरा चरण होगा, जिसमें 12 जुलाई 2025 तक आवेदन किए जा सकेंगे।

निजी स्कूलों में मिलेगा नर्सरी से पहली कक्षा तक निशुल्क दाखिला

RTE अधिनियम के तहत 3.5 से 6.5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को नर्सरी और पहली कक्षा में निशुल्क दाखिले का अवसर मिलेगा। पहले चरण की प्रक्रिया (CG RTE Admission 2025 Bilaspur) के बाद जिले के कई स्कूलों में सीटें खाली रह गई थीं, जिन्हें अब भरा जाएगा। आवेदन करने के बाद लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से चयन किया जाएगा, और 31 जुलाई तक स्कूलों में एडमिशन कराना होगा।

राज्य में 52,150 सीटें, 2.9 लाख से अधिक छात्र उठा रहे लाभ

छत्तीसगढ़ में इस बार 6676 निजी स्कूलों में कुल 52,150 सीटें आरटीई (CG RTE Admission 2025 Bilaspur) के तहत आरक्षित की गई हैं। पहले चरण की प्रक्रिया मई में पूरी हो चुकी है और अब दूसरे चरण में एक लाख से अधिक आवेदन मिल चुके हैं। इस अधिनियम के अंतर्गत अभी राज्यभर में लगभग 2.9 लाख छात्र निशुल्क शिक्षा का लाभ ले रहे हैं।

आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज और पात्रता

ऑनलाइन आवेदन के दौरान अभिभावकों को जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करने होंगे। आवेदन केवल शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से किया जा सकेगा। लॉटरी का परिणाम 22 और 23 जुलाई को जारी किया जाएगा, जिसके बाद चयनित छात्रों को 18 से 31 जुलाई के बीच स्कूल में दाखिला दिलाना अनिवार्य होगा।

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समानता और अवसर की दिशा में बड़ा कदम

RTE अधिनियम 2009 में पारित और 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ था। इसका उद्देश्य समाज के दुर्बल और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को भी निजी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण और निशुल्क शिक्षा देना है। पहले इस योजना का लाभ कक्षा आठवीं तक था, लेकिन अब बच्चे बारहवीं तक निशुल्क शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।

राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि प्राइवेट स्कूलों की प्रारंभिक कक्षाओं में 25% सीटें आरक्षित रहें ताकि समाज के सभी वर्गों को बराबरी का अवसर मिल सके। RTE के इस दूसरे चरण की प्रक्रिया यह दर्शाती है कि राज्य सरकार शिक्षा को लेकर गंभीर है और यह योजना गरीब, आदिवासी, और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए वरदान साबित हो रही है। अभिभावक समय पर आवेदन कर इस अवसर का लाभ ले सकते हैं।

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