हाईकोर्ट ने प्राचार्य पदोन्नति पर लगाई रोक: 16 अप्रैल तक शासन जारी नहीं कर सकेगा आदेश, अगली सुनवाई में फैसला

CG Principal Promotion Case: छत्तीसगढ़ में प्राचार्य पद पर पदोन्नति के लिए बीएड अनिवार्यता को लेकर कानूनी बहस तेज हो गई है। हाईकोर्ट बिलासपुर की डबल बेंच इस मामले में अहम फैसला देगी

CG Principal Promotion Case

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हाइलाइट्स 

बीएड अनिवार्यता को लेकर दो याचिकाएं 

16 अप्रैल को मामले की अगली सुनवाई

शासन जारी नहीं करेगा पदोन्‍नति आदेश

CG Principal Promotion Case: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने प्राचार्य पदोन्नति के मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई करते हुए अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई (16 अप्रैल) तक पदोन्नति सूची (CG Principal Promotion Case) जारी नहीं की जाए। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिंहा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ के समक्ष याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें प्राचार्य पदोन्नति के लिए बी.एड. डिग्री को अनिवार्य बनाए जाने के मुद्दे पर गहन बहस हुई।

याचिकाकर्ता पक्ष (अखिलेश कुमार त्रिपाठी के वकीलों) ने अपने तर्क रखते हुए कहा (CG Principal Promotion Case) कि बी.एड. अनिवार्यता नियम अनुचित है। इंटरविनर की ओर से वकील आलोक बख्शी ने अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं। शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत ठाकुर ने राज्य सरकार का पक्ष रखा।

कोर्ट ने शासन को जारी किया आदेश

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मुख्य न्यायाधीश ने सभी पक्षों को रिजॉइंडर (जवाबी दलील) दाखिल (CG Principal Promotion Case) करने का निर्देश दिया। साथ ही, अगली सुनवाई 16 अप्रैल के लिए निर्धारित की गई और शासन को आदेश दिया गया कि तब तक पदोन्नति प्रक्रिया पर रोक बनी रहेगी। इस मामले में अब अगली सुनवाई का इंतजार है, जिसमें कोर्ट का फैसला शिक्षक पदोन्नति नीति को प्रभावित कर सकता है।

क्‍या है पूरा मामला समझे, सुनवाई से पहले तक क्‍या हुआ?

छत्तीसगढ़ में प्राचार्य पद पर पदोन्नति के लिए बीएड अनिवार्यता को लेकर कानूनी बहस तेज हो गई है। हाईकोर्ट बिलासपुर की डबल बेंच ने इस मामले में आज 26 मार्च को अहम फैसला (CG Principal Promotion Case) सुनाने की संभावना जताई है। इस फैसले से सैकड़ों शिक्षकों का भविष्य तय होगा, जो प्राचार्य पद के लिए योग्यता को लेकर विवाद में फंसे हुए हैं।

पदोन्‍नति मामले में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें व्याख्याता अखिलेश त्रिपाठी ने याचिका दायर कर मांग की कि प्राचार्य पदोन्नति (CG Principal Promotion Case) के लिए बीएड अनिवार्य किया जाए और केवल बीएड धारकों को ही यह अवसर मिले। प्राचार्य पदोन्नति फोरम ने हस्तक्षेप याचिका दाखिल करके तर्क दिया कि प्राचार्य पद प्रशासनिक है, न कि शैक्षणिक, इसलिए डीएड/बीटीआई/डीएलएड धारकों को भी पदोन्नति का अधिकार मिलना चाहिए।

प्राचार्य के पद को लेकर फोरम का तर्क

[caption id="attachment_783740" align="alignnone" width="608"]CG Principal Promotion पूर्व में पदोन्‍नति की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था (फाइल फोटो)[/caption]

फोरम ने तर्क दिया है कि प्राचार्य (CG Principal Promotion Case) पद के 10% पद सीधी भर्ती से भरे जाते हैं, जहां बीएड अनिवार्य है। लेकिन विभागीय पदोन्नति (DPC) में ऐसा कोई स्पष्ट नियम नहीं है। डीएड/बीटीआई/डीएलएड धारक भी वर्षों से शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं और उन्हें भी प्रमोशन का मौका मिलना चाहिए।

फोरम ने लोक सेवा आयोग से की भेंट

20 मार्च 2025 को प्राचार्य पदोन्नति (CG Principal Promotion Case) फोरम के प्रतिनिधियों ने लोक सेवा आयोग की अध्यक्ष रीता शांडिल्य से मुलाकात की। आयोग ने DPC प्रक्रिया को पूरा करने का आश्वासन दिया, लेकिन इसमें 1-2 दिन और लग सकते हैं, इसकी बात कही गई। स्कूल शिक्षा विभाग भी इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहा है।

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[caption id="attachment_783741" align="alignnone" width="605"]Principal Promotion Case पूर्व में पदोन्‍नति की मांग को लेकर विधानसभा अध्‍यक्ष से की थी मुलाकात (फाइल फोटो)[/caption]

आज के फैसले में क्‍या हो सकता है ?

हाईकोर्ट का फैसला बीएड की अनिवार्यता पर स्पष्टता लाएगा।

अगर कोर्ट बीएड को अनिवार्य करता है, तो हजारों डीएड/बीटीआई धारक शिक्षकों को झटका लग सकता है।

अगर कोर्ट पदोन्नति में बीएड को अनिवार्य नहीं मानता, तो यह फैसला प्राचार्य पदोन्नति फोरम के पक्ष में जाएगा।

इससे शिक्षकों की करियर ग्रोथ प्रभावित होगी।

भविष्य की भर्तियों और पदोन्नति नीतियों पर असर पड़ेगा।

छत्तीसगढ़ के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी इस तरह के मामले चल रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव हो सकता है।

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