CG News: आदिम जाति सेवा सहकारी समिति कर्मचारियों की हड़ताल

CG News: आदिम जाति सेवा सहकारी समिति कर्मचारियों की हड़ताल किसानों के लिए बनी मुसीबत

CG News: आदिम जाति सेवा सहकारी समिति कर्मचारियों की हड़ताल किसानों के लिए बनी मुसीबत
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रायपुर। CG News आदिम जाति सेवा सहकारी समिति के कर्मचारियों की हड़ताल किसानों के लिए मुसीबत बन रही है। किसान खाद-बीज के लिए सहकारी समितियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, जबकि समिति संचालक अपनी मांगों की पूर्ति के लिए अड़े हुए हैं। वही प्रशासन ने अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनाई है, जिसके चलते किसान लगातार परेशान हो रहे हैं।

खेती किसानी की तैयारियां पूरी

छत्तीसगढ़ में मानसून प्रवेश करने में अब कुछ ही दिनों की देरी है। किसानों ने मानसून के पहले ही खेती-किसानी की तैयारियां पूरी कर ली हैं। अब सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से उन्नत किस्म के बीजों की खरीदी कर खेतों में व्यवस्थित करना है।

कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर

समय कुछ ही दिनों का बाकी है, तो वहीं दूसरी ओर सेवा सहकारी समिति के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं। हालांकि, हड़ताल पर जाने के पूर्व समिति प्रबंधकों ने पादुका वितरण कर दिया था, जिससे किसानों को कुछ राहत मिल रही है।

समितियों के चक्कर लगा रहे किसान

किसानों के पास जितना खाद है उससे काम नहीं चलना है, वहीं बीज की आवश्यकता सिर पर खड़ी है। किसान धान का उन्नत बीज लेने के लिए सेवा सहकारी समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। या तो किसानों को कर्मचारी नहीं मिलते और यदि मिलते भी हैं तो उनसे काम नहीं हो पा रहा है।

समिति प्रबंधकों और कर्मचारियों की हड़ताल पर किसानों का कहना है कि यदि समितियों से धान-बीज और केसीसी नहीं मिलेगा, तो उन्हें खुले बाजार से ऊंचे दर पर खाद-बीज खरीदना पड़ेगा, जिसके लिए व्यय अधिक होगा।

राहत देने का उपाय नहीं आ रहा नजर

एक तरफ समिति प्रबंधकों की हड़ताल जारी है, वहीं दूसरी तरफ मानसून सर पर खड़ा है। ऐसे में कृषि विभाग की बड़ी जिम्मेदारी है कि किसानों को खाद-बीज उपलब्ध हो सके। लेकिन कृषि विभाग के अधिकारियों के पास भी किसानों को राहत देने का कोई उपाय नजर नहीं आ रहा है।

व्यवस्था बनाना काफी मुश्किल

इस मामले में उप संचालक कृषि विभाग का कहना है कि बिना समिति प्रबंधकों की हड़ताल खत्म हुए व्यवस्था बनाना काफी मुश्किल है। क्योंकि, यह फाइनेंशियल काम है इसलिए सहायक पंजीयक से इस संदर्भ में बात की जा रही है पर सार्थक परिणाम मिलना मुश्किल है।

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