CG News: चुनावी नतीजे पर 'NOTA' का प्रभाव, इस विधानसभा में हार-जीत के अंतर से अधिक पड़े थे 'नोटा' वोट

CG News: चुनाव आयोग ने जनता को बेहतर प्रत्याशी नहीं मिलने पर नोटा दबाने का ऑप्शन दिया हुआ है। इसका असर विधानसभा चुनाव में देखने को मिलता है।

CG News: चुनावी नतीजे पर 'NOTA' का प्रभाव, इस विधानसभा में हार-जीत के अंतर से अधिक पड़े थे 'नोटा' वोट

रायपुर से गौरव शुक्ला की रिपोर्ट।

CG News: चुनाव आयोग ने जनता को बेहतर प्रत्याशी नहीं मिलने पर नोटा दबाने का ऑप्शन दिया हुआ है। बीते चुनावों की अगर बात की जाए तो प्रदेशभर के सभी 90 विधानसभा चुनाव में लगभग 2 लाख लोगों ने प्रत्याशियों को रिजेक्ट कर दिया है। इसका असर कई बार विधानसभा चुनाव में देखने को मिलता है।

कई विधानसभा सीटों में हार-जीत के अंतर से ज्यादा नोटा का वोट होता है। लेकिन क्या यह नोटा हार-जीत पर सीधा प्रभाव डाल रहा है, देखिए यह रिपोर्ट

नोटा को लेकर चर्चा जारी

छत्तीसगढ़ में 2023 विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही एक चर्चा नोटा को लेकर भी होने लगी है। राजनीतिक दल यदि मतदाताओं को साध नहीं पाते है तो सत्ता की कुर्सी खिसक जाती है। वहीं नाराज मतदाता जमकर नोटा का प्रयोग भी करते है।

2 लाख से अधिक लोगों ने किया था नोटा पसंद

2018 के विधानसभा चुनाव में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। 90 विधानसभा क्षेत्रों में 2 लाख 82 हजार 738 लोंगो ने नोटा का विकल्प चुना था। हालांकि नोटा को लेकर 2023 विधानसभा चुनाव में भी चर्चा होने लगी है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि निर्वाचन आयोग को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए। कई बार हार-जीत का फैसला से ज्यादा नोटा को वोट पड़ता है। नोटा को बंद कर देना चाहिए।

2018 में दंतेवाड़ा सीट पर पड़े थे सबसे ज्यादा नोटा वोट

2018 विधानसभा चुनाव के नतीजों पर गौर करें तो सबसे ज्यादा नोटा का प्रयोग दंतेवाड़ा विधानसभा सीट पर किया गया। दंतेवाड़ा विधानसभा में क्षेत्र की जनता ने 9 हजार 929 वोट नोटा को दिया है। जबकि दंतेवाड़ा विधानसभा सीट में हार जीत का अंतर महज 2 हजार 172 वोटों का रहा है।

ऐसी ही स्थिति प्रदेश के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी देखने को मिली है। हालांकि बीजेपी भी यह मानती है कि नोटा को लेकर विचार करना चाहिए। नोटा को लेकर बीजेपी मीडिया विभाग के केंद्रीय संयोजक सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा सभी लोग जाए वोट करने के लिए और ज्यादा से ज्यादा वोट प्रतिशत आये इसलिए नोटा लाया गया।

राजनीतिक दलों की सोच होती है कि उनकी प्रति रुझान क्यों नही आ रहा हैं नोटा में क्यों जा रहा है। राजनीतिक दलों को एक प्रकार की प्रेरणा मिल रही है नोटा से आप कुछ बेहतर करें ताकि जो वोट पड़ने जा रहे हैं वो नोटा न पड़कर पार्टी के पक्ष में पड़े।

2018 विधानसभा चुनाव में नोटा को मिला वोट

- दंतेवाड़ा में 9929 लोंगो ने नोटा में वोट किया था।
- चित्रकोट में 9824 लोगों ने नोटा को वोट किया था।
- सामरी में 6250
- प्रतापपुर में 5741
- बिन्द्रानवागढ़ में 5515
- गुण्डरदेही में 5014
-सबसे कम खल्लारी सामान्य सीट में 499 नोटा वोट पड़े थे।

चुनाव में कितना अहम किरदार निभाएगा नोटा

विधानसभा चुनाव में कई बार नोटा निर्णायक भूमिका में होती है। कई बार हार जीत से ज्यादा वोट नोटा पर पड़ता है। ऐसी स्थिति में वह वोट कोई काम का भी नहीं होता है। लेकिन जनता अपने मन की बात राजनीतिक दलों तक जरूर पहुंचा देती है।

अब देखना होगा की इस बार 2023 विधानसभा चुनाव में नोटा कितना अहम किरदार निभाता है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश सहित देश के पांच राज्यों में चुनावी सरगर्मियां जोरों पर है।

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