CG NCRB Report : छत्तीसगढ़ में आकस्मिक मौत और आत्महत्या के मामले चिंताजनक स्तर पर, NCRB रिपोर्ट में खुलासा

CG NCRB Report: छत्तीसगढ़ में आकस्मिक मौतें और आत्महत्या के मामले चिंताजनक स्तर पर हैं। बिजली गिरने और नकली शराब से मौतें बढ़ीं, जबकि आत्महत्या में हल्की कमी के बावजूद स्थिति गंभीर बनी हुई है।

CG NCRB Report

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हाइलाइट्स 

  • 2023 में 16,000 आकस्मिक मौतें

  • आत्महत्या में 6.8% की गिरावट

  • नकली शराब से 37 मौतें

CG NCRB Report: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट ने छत्तीसगढ़ में हो रही आकस्मिक मौतों (accidental deaths) और आत्महत्याओं (suicides) को लेकर गंभीर तस्वीर पेश की है। 2023 में छत्तीसगढ़ आकस्मिक मृत्यु के मामलों में देशभर में तीसरे और आत्महत्या के मामलों में चौथे स्थान पर रहा। यह स्थिति प्रदेश की सामाजिक, मानसिक और प्रशासनिक स्थितियों पर सवाल खड़े करती है।

2023 में 16,000 से अधिक आकस्मिक मौतें

NCRB रिपोर्ट के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में 2023 में कुल 16,011 आकस्मिक मौतें दर्ज की गईं। इनमें सिर्फ 230 मौतें प्राकृतिक कारणों से हुईं, जबकि बाकी 15,781 मौतें अन्य अप्राकृतिक कारणों से हुईं। हालांकि 2022 के मुकाबले आकस्मिक मौतों में 5.2% की कमी दर्ज की गई है, फिर भी आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं।

प्राकृतिक कारणों में सबसे ज्यादा मौतें बिजली गिरने (lightning deaths) से हुईं। इन 230 मौतों में से 180 लोग सिर्फ आकाशीय बिजली की चपेट में आए। यह दर्शाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में मौसम से जुड़ी जागरूकता और सुरक्षा उपायों की अभी भी भारी कमी है। देशभर में 2023 में प्राकृतिक कारणों से कुल 6,444 मौतें हुईं, जिनमें से करीब 40% मौतें सिर्फ बिजली गिरने से दर्ज की गईं।

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नकली शराब बनी मौत का जरिया

रिपोर्ट में एक और गंभीर तथ्य सामने आया कि देशभर में 522 लोगों की जान नकली शराब (illicit liquor deaths) के सेवन से गई, जिसमें से छत्तीसगढ़ में 37 मौतें दर्ज की गईं। झारखंड (194), कर्नाटक (79), बिहार (57) और पंजाब (33) के बाद छत्तीसगढ़ इस लिस्ट में पांचवें स्थान पर है।

यह तथ्य राज्य में मिलावटखोरी, अवैध शराब कारोबार और प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ती शराब के नाम पर लोगों को ज़हरीली सामग्री परोसी जाती है, जिससे जानलेवा घटनाएं होती हैं।

आत्महत्या के मामलों में थोड़ी राहत, लेकिन स्थिति अब भी गंभीर

छत्तीसगढ़ में 2022 में जहां 8,446 आत्महत्या के केस दर्ज हुए थे, वहीं 2023 में यह संख्या घटकर 7,868 हो गई। यानी लगभग 6.8 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। हालांकि इस गिरावट के बावजूद राज्य अब भी आत्महत्या दर के मामले में देश में चौथे स्थान पर है।

राज्य की आत्महत्या दर 26 प्रति लाख जनसंख्या है, जो कि राष्ट्रीय औसत 12.3 प्रति लाख से कहीं अधिक है। हालांकि अंडमान-निकोबार (49.6) और पुडुचेरी (28) जैसे केंद्र शासित प्रदेश छत्तीसगढ़ से ऊपर हैं, लेकिन मुख्यधारा के राज्यों में यह आंकड़ा चिंताजनक है।

बेरोजगारी और पारिवारिक कलह बनी आत्महत्या की वजह

छत्तीसगढ़ में आत्महत्या के कारणों की बात करें तो मानसिक तनाव (mental stress), आर्थिक तंगी (financial crisis), बेरोजगारी (unemployment), पारिवारिक विवाद (family disputes) और शारीरिक बीमारियां प्रमुख कारण रहे हैं।

पुरुषों और महिलाओं दोनों में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ रही है, लेकिन पुरुषों में आत्महत्या की दर अधिक देखी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि संकट और कर्ज का दबाव भी इस समस्या को बढ़ावा दे रहा है।

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नीतियों पर पुनर्विचार की ज़रूरत

एनसीआरबी की रिपोर्ट सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि सरकार और समाज दोनों के लिए एक चेतावनी है। आकस्मिक मौतों और आत्महत्याओं के पीछे कहीं न कहीं प्रशासनिक खामियां, जागरूकता की कमी और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव जिम्मेदार हैं।

सरकार को चाहिए कि वह बिजली गिरने से बचाव के लिए अलर्ट सिस्टम, ग्रामीण इलाकों में सुरक्षित शेल्टर, मानसिक स्वास्थ्य परामर्श केंद्र, नकली शराब के धंधे पर कठोर कार्रवाई और रोज़गार के अवसरों में विस्तार जैसी योजनाओं पर तेज़ी से काम करे।

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