CG Naib Tahsildar: खैरागढ़ में नायब तहसीलदार सस्पेंड, असली जमीन मालिक का रिकॉर्ड से नाम हटाया, कमिश्नर ने की कार्रवाई

Chhattisgarh (CG) Naib Tahsildar Rashmi Dubey Suspended: छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में नायब तहसीलदार की घोर लापरवाही सामने आई है। जिसमें दुर्ग कमिश्नर ने नायब तहसीलदार रश्मि दुबे को सस्पेंड कर दिया है।

CG Naib Tahsildar Suspended

CG Naib Tahsildar Suspended

CG Naib Tahsildar Suspended: छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में नायब तहसीलदार की खोर लापरवाही सामने आई है। जिसमें दुर्ग कमिश्नर ने तत्कालीन नायब तहसीलदार रश्मि दुबे को सस्पेंड कर दिया है। नायब तहसीलदार पर आरोप है कि उन्होंने एक भूमि विवाद में असली जमीन मालिक को सुने बिना ही उसका राजस्व रिकॉर्ड से नाम हटा दिया और दूसरों का नाम चढ़ा दिया।

खैरागढ़ में जमीन मामले में हुए आदेश ने तहसील से लेकर संभाग मुख्यालय तक हड़कंप मचा दिया है। मामले में खैरागढ़ की तत्कालीन नायब तहसीलदार रश्मि दुबे को कमिश्नर सत्य नारायण राठौर ने चार सितंबर को निलंबित कर दिया।

कमिश्नर से शिकायत के बाद कार्रवाई

नायब तहसीलदार रश्मि दुबे ने खैरागढ़ में पोस्टिंग के दौरान भूमि विवाद में ऐसा आदेश पारित किया, जिसमें असली भूमिधारी को सुने बिना ही रिकॉर्ड से उसका नाम हटा दिया और दूसरों का नाम चढ़ा दिया। मामला खैरागढ़ के खसरा नंबर 163, जिसका रकबा 0.214 हेक्टेयर का है। अभिलेखों के मुताबिक, यह जमीन वर्ष 1968-69 से अश्वनी पिता रामाधीन के नाम दर्ज है। इस विवाद की शिकायत भी अश्वनी ने ही सीधे कमिश्नर से की थी।

दो महीने में ही कर दिया आदेश

मामले की जांच में सामने आया कि 2021 में नायब तहसीलदार रश्मि दुबे ने केवल दो महीने के भीतर आदेश जारी कर दिया। इसमें न तो भूमि मालिक अश्वनी को पक्षकार बनाया गया और ना ही सुनवाई का मौका दिया गया। कब्जे के आधार पर स्वामित्व तय कर दिया गया, जबकि कानून कहता है कि यह राजस्व न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

जांच में सामने आई थी लापरवाही

इस मामले में शिकायत के बाद कमिश्नर ने जांच कराई तो नायब तहसीलदार की लापरवाही सामने आई। इसके बाद कमिश्नर ने नायब तहसीलदार के आदेश को कानून के विरुद्ध बताया और निरस्त कर दिया। वहीं कमिश्नर ने सीधी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन नायब तहसीलदार रश्मि दुबे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

कमिश्नर के आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कलेक्टर कार्यालय कबीरधाम तय किया गया है। उन्हें केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। इस आदेश ने खैरागढ़ से लेकर कबीरधाम तक राजस्व अमले में सनसनी फैला दी है। अब सवाल उठ रहा है कि यह मामला सिर्फ लापरवाही का है या फिर इसके पीछे किसी दबाव या मिलीभगत की कहानी है।

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