किराएदार-मकान मालिक विवाद: जिस व्‍यक्ति से मकान खरीदा, उसे ही बना लिया टेनेंट; बिलासपुर हाई कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

Chhattisgarh Landlord-Tenant House Rent Controversy; छत्‍तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में एक दिलचस्प मामला सामने आया है। जहां एक शख्स ने एक मकान खरीदा और उसी मकान को उसके पुराने मकान मालिक को किराए पर दे

Makan Malik Vs Kirayedar

Makan Malik Vs Kirayedar

Makan Malik Vs Kirayedar: छत्‍तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में एक दिलचस्प मामला सामने आया है। जहां एक शख्स ने एक मकान खरीदा और उसी मकान को उसके पुराने मकान मालिक (Makan Malik Vs Kirayedar) को किराए पर दे दिया। इस मामले में कुछ समय बाद जब किराया नहीं मिला तो नए मकान मालिक ने पुराने मकान मालिक जो अब किराएदार थे, को मकान खाली करने को कहा, लेकिन किराएदार ने मना कर दिया।

इस पर मकान मालिक कृष्ण कुमार कहार और शोभा कुमारी ने किराया न मिलने और मकान (Makan Malik Vs Kirayedar) खाली न करने की शिकायत किराया नियंत्रण प्राधिकरण/एसडीएम चांपा में की थी। प्राधिकरण ने किराएदार दशोदा बाई धीवर और राम प्रसाद को मकान खाली करने और 28 हजार रुपए बकाया किराया देने का आदेश दिया था।

किराएदार ने फैसले को दी चुनौती, फैसला पलटा

किराएदार ने इस फैसले को किराया नियंत्रण ट्रिब्यूनल रायपुर (Makan Malik Vs Kirayedar) में चुनौती दी। 28 अप्रैल 2023 को ट्रिब्यूनल ने कहा कि एसडीएम ने सही प्रक्रिया नहीं अपनाई और इसलिए पहले वाला फैसला रद्द कर दिया गया। इसके बाद मकान मालिक को न्‍याय नहीं मिला तो उसने हाईकोर्ट की शरण ली।

मकान मालिक ने हाईकोर्ट में की अपील

मकान मालिक ने किराया नियंत्रण ट्रिब्‍यूनल (Makan Malik Vs Kirayedar) के फैसले के विरोध में बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की। जहां जस्टिस रजनी दुबे और बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की और कहा कि ट्रिब्यूनल ने जो प्रक्रिया में खामी बताई है, वो सही है।

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गड़बड़ियों पर कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

कोर्ट ने बताया कि दो गवाहों के हलफनामे दिए तो गए, पर रिकॉर्ड में तारीख नहीं है कि कब लिए गए। प्राधिकरण ने सही तरीके से मुद्दे तय नहीं किए। दोनों पक्षों को अपनी बात कहने और सबूत पेश करने का पूरा मौका नहीं मिला। मामला फिर से किराया प्राधिकरण को भेजा गया है।

पूरी प्रक्रिया अपनाकर देना होगा फैसला

हाई कोर्ट ने कहा कि अब मकान मालिक (Makan Malik Vs Kirayedar) फिर से नया आवेदन दे सकते हैं। प्राधिकरण को कानून के मुताबिक पूरी प्रक्रिया अपनाकर निष्पक्ष तरीके से फैसला देना होगा। कोर्ट ने ये भी साफ किया कि उसने अभी किसी भी पक्ष के पक्ष में या खिलाफ कोई राय नहीं दी है।

अंत में कोर्ट ने ये भी कहा कि अगर कहीं प्रक्रिया में गलती हो गई है, तो उससे किसी को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता। प्रक्रिया का मतलब यह नहीं कि उसका गलत इस्तेमाल कर किसी के हक को छीना जाए।

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