जघन्य यौन और हत्या मामला: CG हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की सुनवाई पर जताई कड़ी नाराजगी, कहा- पाक्सो से बरी करना गंभीर भूल

CG High Court News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जांजगीर-चांपा की नाबालिग छात्रा से रेप और हत्या के मामले में आरोपी को पाक्सो एक्ट से बरी करने पर ट्रायल कोर्ट को फटकार लगाई।

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

CG High Court News : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक नाबालिग छात्रा के साथ जघन्य यौन अपराध और हत्या के मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को पाक्सो एक्ट से बरी किए जाने पर सख्त नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि “ऐसे गंभीर अपराध में मेडिकल और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के बावजूद आरोपी को बरी करना न्याय की बड़ी त्रुटि है।”

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने यह भी टिप्पणी की कि इस मामले में शासन की ओर से अपील नहीं दायर किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में राज्य की चुप्पी “बच्चे के साथ हुए अपराध की गंभीरता को कम नहीं कर सकती।”

मेडिकल रिपोर्ट को नजरअंदाज करना न्याय के साथ अन्याय- हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में लिखा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से यह स्पष्ट है कि पीड़िता का पहले अपहरण, फिर यौन उत्पीड़न किया गया और अंत में उसकी हत्या कर दी गई। न्यायालय ने कहा, “जब पीड़िता के साथ यौन अत्याचार के स्पष्ट सबूत मौजूद थे, तब केवल हत्या के आधार पर दोषसिद्धि देना गलत है। ट्रायल कोर्ट ने कानून की गंभीर व्याख्या में गलती की है।”

अदालत ने कहा कि जब किसी नाबालिग के साथ बलात्कार और हत्या दोनों साबित हों, तो न्यायालय आरोपी को सिर्फ हत्या का दोषी ठहराकर नहीं छोड़ सकता।

नाबालिग छात्रा के साथ हुआ था बर्बर अपराध

यह मामला जांजगीर-चांपा जिले के जैजैपुर थाना क्षेत्र का है, जहां 12 साल 7 महीने की छात्रा 28 फरवरी 2022 की रात घर से लापता हो गई थी। उसके पिता ने अगले दिन थाने में अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई। तीन दिन बाद 3 मार्च 2022 को उसकी लाश गांव के तालाब से मिली।

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी जवाहर ने नाबालिग को पहले कीटनाशक पिलाया, फिर जबरदस्ती रेप किया और बाद में उसकी हत्या कर शव को तालाब में फेंक दिया। आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने के लिए लड़की की जेब में फर्जी सुसाइड नोट भी रख दिया था।

ट्रायल कोर्ट ने सिर्फ हत्या में दोषी ठहराया, पाक्सो से बरी किया

सक्ति न्यायालय ने आरोपी जवाहर को आईपीसी की धारा 302 और 201 के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, लेकिन पाक्सो एक्ट की धारा 4 और 6 के गंभीर अपराधों से उसे बरी कर दिया था। इसी फैसले पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि यह निर्णय “न्यायिक दृष्टि से अनुचित और असंगत” है, क्योंकि मेडिकल रिपोर्ट ने यौन हमले के पुख्ता प्रमाण दिए थे।

प्रेम संबंध का झांसा देकर किया था अपराध

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी और मृतका के बीच करीब आठ महीने से संबंध थे। आरोपी ने लड़की को एक मोबाइल गिफ्ट किया था। घटना वाली रात आरोपी ने उसे घर बुलाया, कहा कि वे दोनों आत्महत्या करेंगे। बाद में उसने बीयर में कीटनाशक मिलाकर पिलाया, रेप किया और फिर गला घोंटकर हत्या कर दी। डॉक्टरों की रिपोर्ट के अनुसार, लड़की के जननांगों पर गंभीर चोटें थीं, जो निर्दय यौन हमले की पुष्टि करती हैं।

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हाईकोर्ट की चेतावनी- ऐसे मामलों में राज्य को सक्रिय रहना होगा

अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को इस तरह के मामलों में “अपील दायर करने में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।” न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की कि बच्चों के खिलाफ अपराधों में न्याय में देरी या अपील की अनुपस्थिति समाज के प्रति अन्याय के समान है।

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