CG High Court:छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने माना पति को पालतू चूहा कहना मानसिक क्रूरता, पत्नी को 5 लाख गुजारा भत्ता देने का आदेश

CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति को पालतू चूहा कहने और सास-ससुर से अलग रहने की जिद को मानसिक क्रूरता माना। कोर्ट ने पत्नी को 5 लाख स्थायी गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया।

CG High Court

हाइलाइट्स 

  • पत्नी की जिद को माना क्रूरता
  • हाईकोर्ट ने दिया 5 लाख भत्ता
  • टेक्स्ट मैसेज बना बड़ा सबूत

CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तलाक के एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि पति को माता-पिता से अलग करने की जिद करना और उसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित करना मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) की श्रेणी में आता है। अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए पत्नी को अपने पूर्व पति से स्थायी गुजारा भत्ता (Alimony) के रूप में 5 लाख रुपये देने का आदेश दिया है। साथ ही बेटे की परवरिश के लिए हर महीने गुजारा भत्ता जारी रखने का निर्देश भी दिया गया है।

[caption id="attachment_894312" align="alignnone" width="1153"]cg high court छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट[/caption]

फैमिली कोर्ट से हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला

रायपुर निवासी दंपति की शादी 28 जून 2009 को हुई थी। एक साल बाद 5 जून 2010 को उनका बेटा हुआ। पति ने पत्नी पर क्रूरता और परित्याग (Cruelty and Desertion) का आरोप लगाते हुए फैमिली कोर्ट रायपुर में तलाक की याचिका दायर की। 23 अगस्त 2019 को फैमिली कोर्ट ने तलाक को मंजूरी दी। इसके खिलाफ पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील की।

पति ने कोर्ट में आरोप लगाया कि पत्नी उसके माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार करती थी और उनसे अलग रहने की जिद करती थी। ऐसा न करने पर वह आक्रामक हो जाती और कई बार अपमानजनक व्यवहार करती। पति ने यह भी बताया कि पत्नी उसे पालतू चूहा कहकर संबोधित करती थी और यहां तक कि उसने गर्भपात करने का भी प्रयास किया। अगस्त 2010 में पत्नी मायके चली गई और फिर कभी ससुराल नहीं लौटी।

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टेक्स्ट मैसेज बना बड़ा सबूत

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पत्नी के भेजे एक टेक्स्ट मैसेज को अहम सबूत माना। संदेश में लिखा था – अगर तुम अपने माता-पिता को छोड़कर मेरे साथ रहना चाहते हो तो जवाब दो, वरना मत पूछो। प्रति परीक्षण में पत्नी ने स्वीकार किया कि यह संदेश उसी ने भेजा था और यह भी माना कि अगस्त 2010 के बाद वह कभी अपने ससुराल नहीं लौटी।

कोर्ट ने माना मानसिक क्रूरता

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच जिसमें जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद शामिल थे, ने माना कि भारतीय संयुक्त परिवार व्यवस्था (Joint Family System) में पति को माता-पिता से अलग रहने के लिए मजबूर करना मानसिक क्रूरता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह का दबाव वैवाहिक संबंधों को कमजोर करता है और वैवाहिक जीवन की नींव को हिलाता है।

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आर्थिक स्थिति और गुजारा भत्ता

फैमिली कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों ने पति-पत्नी की आय पर विचार किया। पत्नी वर्तमान में लाइब्रेरियन (Librarian Job) के पद पर कार्यरत है और अपने बेटे के साथ रहती है। पति छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (Chhattisgarh State Cooperative Bank) में अकाउंटेंट है। बेटे के पालन-पोषण के लिए पत्नी को पहले से ही 6 हजार रुपये और बेटे को हर माह 1 हजार रुपये भत्ता मिल रहा था। अब हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि पति अपनी पत्नी को एकमुश्त 5 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता भी अदा करे।

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