CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फूड इंस्पेक्टर की बर्खास्तगी रद्द की, दो दिन बाद रायपुर कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

CG Food Inspector Imprisonment: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फूड इंस्पेक्टर प्रहलाद राठौर की बर्खास्तगी को रद्द किया, लेकिन दो दिन बाद रायपुर की अदालत ने उसे अपहरण और अनाचार के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई। जानिए पूरा घटनाक्रम कैसे हुआ।

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CG High Court

CG Food Inspector Imprisonment : छत्तीसगढ़ में एक चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। हाईकोर्ट ने जिस फूड इंस्पेक्टर की बर्खास्तगी के आदेश को रद्द किया था, उसे दो दिन बाद ही रायपुर की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामला अपहरण, धमकी और अनाचार से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने आरोपी को दोषी पाया और जेल भेज दिया।

हाईकोर्ट ने रद्द की बर्खास्तगी, माना पक्ष नहीं सुना गया

पेंड्रा रोड निवासी प्रहलाद प्रसाद राठौर, जो भारतीय नौसेना में करीब पांच साल सेवा देने के बाद फूड इंस्पेक्टर बने थे, को मार्च 2024 में पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट के आधार पर बर्खास्त कर दिया गया था। रिपोर्ट में पुराने आपराधिक मामलों का जिक्र था। राठौर ने इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

उन्होंने तर्क दिया कि वर्ष 2002 में दर्ज दोनों मामले उनके नाबालिग होने के दौरान के थे और पड़ोसी से मामूली झगड़े के थे, जो 2007 में लोक अदालत में समझौते के बाद समाप्त हो गए थे। साथ ही, बर्खास्तगी से पहले न तो उनका पक्ष सुना गया और न ही जवाब मांगा गया। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने उनकी दलीलों को स्वीकार करते हुए 3 नवंबर 2025 को दिए आदेश में बर्खास्तगी को निरस्त कर दिया।

दो दिन बाद आया दूसरा फैसला, मिली उम्रकैद की सजा

लेकिन इसी फैसले के दो दिन बाद रायपुर की स्पेशल कोर्ट (एट्रोसिटीज) ने उसी राठौर को एक अन्य गंभीर मामले में दोषी करार दिया। जिला पंचायत सदस्य की शिकायत पर दर्ज इस मामले में आरोप था कि राठौर ने खुद को अविवाहित बताकर महिला से संबंध बनाए, बाद में वीडियो वायरल करने की धमकी देकर होटल बुलाया और बंधक बनाकर अनाचार किया। अगले दिन उसने महिला को सुनसान जगह ले जाकर मारपीट और धमकी भी दी। कोर्ट ने सुनवाई के बाद उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई और रायपुर जेल भेज दिया।

पूर्व नौसैनिक से अपराधी तक का सफर

भूतपूर्व सैनिक के रूप में सम्मानित सेवा देने वाले प्रहलाद राठौर का सरकारी सेवा से लेकर जेल की सलाखों तक पहुंचना एक बड़ा उदाहरण बन गया है। पहले प्रशासनिक बर्खास्तगी, फिर राहत और अंत में सजा- यह पूरा घटनाक्रम नौकरशाही में नैतिकता और जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करता है।

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