CG Election 2023: दंतेवाड़ा में दिलचस्‍प होगा मुकाबला, BJP ने 'चेतराम अरामी' को दिया टिकट, जानिए यहां के चुनावी मुद्दे

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के त्‍वरित बाद बीजेपी ने अपने 64 प्रत्‍याशियों की दूसरी लिस्‍ट जारी कर दी थी।

CG Election 2023: दंतेवाड़ा में दिलचस्‍प होगा मुकाबला, BJP ने 'चेतराम अरामी' को दिया टिकट, जानिए यहां के चुनावी मुद्दे

दंतेवाड़ा से रजत वाजपेयी की रिपोर्ट। CG Election 2023: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होने के त्‍वरित बाद बीजेपी ने अपने 64 प्रत्‍याशियों की दूसरी लिस्‍ट जारी कर दी थी।

इस सूची में दंतेवाड़ा विधानसभा सीट से बीजेपी ने ‘चेतराम अरामी’ को मौका दिया है। वहीं कांग्रेस ने अभी तक एक भी प्रत्‍याशी का नाम घोषित नहीं किया है।

आदिवासी सबसे बड़ा वोट बैंक

इस विधानसभा पर आदिवासी समुदाय सबसे बड़ा वोट वोट बैंक है, यही वजह है कि यहां से आदिवासी प्रत्याशी को मौका मिलता है।

बता दें कि वर्तमान में कुल मतदाता 1, 92, 323 हैं। इनमें से 90,084 पुरूष और 1,02,237 महिला मतदाता हैं। पुरूषों के मुकाबले महिला मतदाताओं की संख्या यहां अधिक है।

वहीं अगर जातिगत समीकरणों की बात की जाए तो आदिवासी 80 प्रतिशत, ओबीसी - 10 प्रतिशत: सामान्य - 10 प्रतिशत हैं। साथ ही कुल 279 मतदान केंद्र हैं। इनमें कई मतदान केंद्र अति संवेदनशील भी हैं।

2018 में बीजेपी की जीत

2018 के चुनाव में विधायक की दावेदारी करने वाले कुल 7 प्रत्याशी मैदान में थे। भाजपा से भीमा मंडावी ने 37 हजार 990 वोट पाकर जीत दर्ज की थी।

वहीं कांग्रेस प्रत्याशी देवती कर्मा को 35 हजार 818 वोट मिल थे। 2018 में भाजपा ने बस्तर से केवल एक ही सीट पर जीत हासिल की थी।

दंतेवाड़ा विधानसभा के चुनावी मुद्दे -

- दंतेवाडा विधानसभा में ऐसे कई ग्रामीण क्षेत्र हैं, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहुंच पाईं हैं। जिससे इस क्षेत्र के रहने वाले ग्रामीणों को कई किमी पैदल चलकर मरीजों को कंधों पर लेकर अस्पतालों तक लेजाना पड़ता है।

- ग्रामीण क्षेत्रों में रोड, नाली, पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कई पंचायतों में हाई स्कूल तक नहीं बने हैं।

जिसको लेकर ग्रामीण कई बार विधायक से मांग कर चुके हैं। ग्रामीणों को मूलभूत समस्याओं से सामना करना पड़ रहा है।

- दंतेवाडा विधानसभा में बेरोजगारी भी एक सबसे बड़ी समस्या है। कई युवा शिक्षित बेरोजगार हैं। दंतेवाड़ा में कोई फैक्ट्री या उद्योग नहीं होने की वजह से अधिकांश युवा कुली-मजदूरी पर ही निर्भर हैं।

रोजगार के अभाव में ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोग अन्‍य प्रदेशों में पलायन करते हैं। दूसरे राज्यों में काम करने के दौरान कुछ लोगों की मौत भी हो चुकी है।

- सबसे बड़ी समस्या नक्सलवाद है। बस्तर की तरह दंतेवाड़ा विधानसभा भी लंबे समय से नक्सल समस्या से जूझ रहा है।

आए दिन यहां नक्सली वारदात आम बात है। इस वजह से अंदरूनी क्षेत्रों में सड़कें नहीं बन पाई हैं। नक्सलियों द्वारा विकास कार्य के विरोध के चलते सरकारी भवन और सड़क निर्माण का कार्य लंबे समय से अटका हुआ है।

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