CG Fake Tender Scam : करोड़ों के फर्जी टेंडर घोटाले में डिप्टी कमिश्नर आनंदजी सिंह निलंबित, विभाग ने की बड़ी कार्रवाई

cg-fake-tender-scam-deputy-commissioner-suspended; छत्तीसगढ़ में करोड़ों के फर्जी टेंडर घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है। आदिवासी विकास विभाग ने डिप्टी कमिश्नर डॉ. आनंदजी सिंह को निलंबित कर दिया है।

CG Fake Tender Scam

CG Fake Tender Scam

हाइलाइट्स 

  • 45 टेंडरों में गड़बड़ी उजागर

  • डिप्टी कमिश्नर आनंदजी सिंह निलंबित

  • दो अफसर जेल में, बाबू फरार

CG Fake Tender Scam Deputy Commissioner Anandji Singh Suspended: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में करोड़ों रुपए के फर्जी टेंडर घोटाले (Fake Tender Scam) का बड़ा मामला सामने आने के बाद आदिवासी विकास विभाग (Tribal Development Department) ने कड़ा एक्शन लिया है।

विभाग ने डिप्टी कमिश्नर डॉ. आनंदजी सिंह (Deputy Commissioner Anandji Singh) को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspended) कर दिया है। यह कार्रवाई दंतेवाड़ा में सहायक आयुक्त के तौर पर उनकी तैनाती के दौरान हुए घोटाले के चलते हुई है।

[caption id="attachment_897843" align="alignnone" width="1109"]publive-image फर्जी टैंडर केस मामले में इन तीनों पर FIR दर्ज हुई है। फोटो में बीच में दिखाई दे रहे शख्स डिप्टी कमिश्नर आनंदजी सिंह हैं।[/caption]

2021 से 2024 तक के टेंडरों की जांच में खुलासा 

जानकारी के मुताबिक, दंतेवाड़ा कलेक्टर (Dantewada Collector) ने वर्ष 2021 से 2024 तक के सभी टेंडरों की जांच कराई थी। इस दौरान आदिवासी विकास विभाग के 45 से अधिक टेंडरों में गंभीर गड़बड़ी सामने आई। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि यह सभी फर्जी तरीके से लगाए गए थे और इसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं।

फर्जी टेंडर घोटाले में डॉ. आनंदजी सिंह और उस समय के सहायक आयुक्त केएस मेसराम (K.S. Mesram) पर मुख्य रूप से जिम्मेदारी तय हुई। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने दोनों अफसरों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हालांकि विभाग का बाबू, जिस पर भी घोटाले में शामिल होने का आरोप है, अब तक फरार चल रहा है।

विभाग ने लिया एक्शन, डिप्टी कमिश्नर सस्पेंड 

इस पूरे प्रकरण पर आदिवासी विकास विभाग ने गंभीरता दिखाते हुए डॉ. आनंदजी सिंह को निलंबित कर दिया। आदेश में कहा गया है कि निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय आयुक्त, आदिम जाति विभाग रायपुर (Commissioner, Tribal Department Raipur) रहेगा। वहीं, सह आरोपी केएस मेसराम अब रिटायर हो चुके हैं, इसलिए उनके खिलाफ सेवा संबंधी कार्रवाई नहीं हो सकी।

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राज्य में गूंजा मामला, प्रशासन पर उठे सवाल 

फर्जी टेंडर घोटाले ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में हलचल मचा दी है। जानकारों का कहना है कि करोड़ों रुपए के इस फर्जीवाड़े ने विभाग की पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। मामले के खुलासे के बाद अब अन्य जिलों के टेंडरों की भी जांच की मांग उठ रही है।

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