सीबीआईसी ने GST Fraud के देशभर के आंकड़ें किये हैं जारी

GST Fraud: जीएसटी चोरी में दिल्ली नंबर वन, फर्जी कंपनी बनाने में महाराष्ट्र टॉप पर, जानें मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की स्थिति

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GST Fraud: केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क (CBIC) बोर्ड के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2023 को समाप्त तिमाही में माल और सेवा कर (GST) में धोखाधड़ी या चोरी (GST Fraud) के मामले में दिल्ली देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में नंबर वन है। वहीं फर्जी कंपनी बनाने में महाराष्ट्र टॉप पर है। धोखाधड़ी (GST Fraud) के इन मामलों में मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (MP-CG) भी पीछे नहीं है।

दिल्ली वालों ने की 3028 करोड़ की चोरी, एमपी-सीजी भी पीछे नहीं

इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की चोरी (GST Fraud) में सबसे अधिक राशि 3028 करोड़ रुपये दिल्ली के नाम है। इसमें मध्यप्रदेश में 158 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी और छत्तीसगढ़ में 83 करोड़ की टैक्स चोरी (GST Fraud)  हुई है।

महाराष्ट्र में 2,201 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश 1,645 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश 756 करोड़ रुपये, हरियाणा 624 करोड़ रुपये, तेलंगाना 536 करोड़ रुपये, तमिलनाडु 494 करोड़ रुपये, गुजरात 445 करोड़ रुपये, कर्नाटक 397 करोड़ रुपये, पश्चिम बंगाल 343 करोड़ रुपये, ओडिशा 337 करोड़ रुपये, राजस्थान 197 करोड़ रुपये, केरल 152 करोड़ रुपये, बिहार 148 करोड़ रुपये, असम 116 करोड़ रुपये और झारखंड 110 करोड़ रुपये में आईटीसी चोरी हुई है। अन्य राज्यों में जीएसटी चोरी (GST Fraud) कम मात्रा में पकड़ी गई थी।

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4153 फर्जी फर्मों में से 926 के साथ महाराष्ट्र शीर्ष पर

4,153 फर्जी फर्मों (Bogus Company) में से 926 के साथ महाराष्ट्र शीर्ष पर है, इसके बाद राजस्थान 507, दिल्ली 483, उत्तर प्रदेश 443, हरियाणा 424, कर्नाटक 223, तमिलनाडु 185, गुजरात 178, ओडिशा 138, पश्चिम बंगाल 126, तेलंगाना 117, मध्यप्रदेश में 70 और छत्तीसगढ़ में 26 फर्जी फर्म पकड़ी गई। अन्य राज्यों में फर्जी फर्मों (Bogus Company) की संख्या कम थी।

एमपी और सीजी में हई एक-एक गिर​फ्तारियां

जीएसटी चोरी (GST Fraud)  और फर्जी कंपनियों (Bogus Company)  को लेकर मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में एक-एक गिरफ्तारियां हुई है। वहीं इस मामले में महाराष्ट्र और दिल्ली सबसे ऊपर हैं।

दोनों राज्यों में क्रमश: 11-11 लोगों को गिरफ्तारी हुई है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश से 5, गुजरात और हरियाणा से 3-3, कर्नाटक 2, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ से 1-1 गिरफ्तारियों हुई हैं। कुल मिलाकर 41 लोग गिरफ्तार हुए हैं।

इन राज्यों से हुई सबसे ज्यादा रिकवरी

सबसे ज्यादा रिकवरी (GST Fraud)  तमिलनाडु से 374 करोड़ रुपये, तेलंगाना से 235 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र से 102 करोड़ रुपये हुई है। इनमें मध्यप्रदेश से 22 करोड़ रुपये और छत्तीसगढ़ से 34 करोड़ रुपये की रिकवरी (GST Fraud) हुई है।

1317 करोड़ रुपये का राजस्व बचाने में मिली मदद

दिसंबर तिमाही के लिए जारी आंकड़ों के अनुसार 12,036 करोड़ रुपये की संदिग्ध आईटीसी (Input Tax Credit) चोरी में शामिल 4,153 फर्जी कंपनियों (Bogus Company) का पता चला है।

इनमें केंद्रीय जीएसटी (GST)  अधिकारियों द्वारा 2,358 फर्जी कंपनियां भी शामिल थीं। इस कार्रवाई से 1,317 करोड़ रुपये का राजस्व बचाने में मदद मिली। जिसमें आईटीसी को अवरुद्ध करके 997 करोड़ रुपये और 319 करोड़ रुपये की वसूली और 41 लोगों की गिरफ्तारी (GST Fraud) शामिल है।

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सख्त हो चुकी है जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रोसेस

अप्रैल 2023 में इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाला (GST Fraud)  पकड़े जाने के बाद केंद्र सरकार ने व्यावसायिक संस्थानों के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन की प्रोसेस सख्त कर दी है। इस बारे में फाइनेंस मिनिस्ट्री द्वारा 14 जून 2023 को जारी की गई जीएसटी रजिस्ट्रेशन की नई गाइडलाइन के अनुसार जीएसटी नंबर के आवेदन के साथ लगाए जाने वाले दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जाएगी।

फर्म के वेरिफिकेशन से जुड़े किसी भी दस्तावेज के बारे में शंका होने पर उसे संबंधित विभाग के क्रॉसचेक कराया जाएगा।

शंका का समाधान नहीं होने पर व्यक्तिगत स्पष्टीकरण के लिए शोकॉज नोटिस जारी किया जाएगा। पहले इस संबंध में आधार वेरिफिकेशन आधारित प्रोसेस होने के कारण फिजिकल वेरिफिकेशन का प्रावधान नहीं था।

जीएसटी आवेदन की रिस्क रेटिंग करेगा DGARM

फर्मों के दस्तावेजों की जांच के अभियान में सैंकड़ों ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें दूसरे व्यक्तियों के पैन कार्ड (PAN) और आधार (AADHAR) नंबर का मिसयूज करते हुए फोटो तक बदल दी गई थी।

इसमें कम पढ़े-लिखे और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कुछ पैसों या सरकारी योजनाओं के लाभ का लालच देकर उनके मोबाइल नंबर भी बदलवा दिए गए।

दस्तावेजों में हेरफेर के ऐसे मामलों पर लगाम लगाने के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन की नई गाइडलाइन में यह तय किया गया है कि जीएसटी नंबर के आवेदन की प्रोसेसिंग से पहले डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ एनैलिटिक्स एंड रिस्क मैनेजमेंट (DGARM) उसकी रिस्क रेटिंग करेगी।

ये रेटिंग हाई, मीडियम और लो कैटेगरी के तहत की जाएगी। इसी रेटिंग के आधार पर जीएसटी आफिसर आवेदन की बारीकी से जांच करने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू करेगा।

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