Card tokenization : आखिर क्या है डेबिट-क्रेडिट कार्ड टोकनाइजेशन? जो 1 जुलाई से होने वाला है लागू

Card tokenization : आखिर क्या है डेबिट-क्रेडिट कार्ड टोकनाइजेशन? जो 1 जुलाई से होने वाला है लागू

नई दिल्ली। आरबीआई के आदेश के बाद 1 जुलाई से Card tokenization डेबिट और क्रेडिट कार्ड से credit card जुड़े नियम बदलने RBI Governor, जा रहे हैं। जिसमें एक शब्द आ रहा है कार्ड टोकनाइजेशन। पर क्या आप जानते हैं इस शब्द का अर्थ और उपयोग क्या है। यदि नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं आसान शब्दों में इसका क्या अर्थ है।

क्या होगा फायदा —
दरअसल कार्ड टोकनाइजेशन लागू होने के बाद मर्चेंट और पेमेंट गेटवे को अपने सर्वर पर ग्राहक के स्टोर किए गए कार्ड का डाटा डिलीट करना होगा। यूजर्स को इसके बाद से मर्चेंट वेबसाइटों पर पेमेंट करने के लिए कार्ड की पूरी डिटेल मेंशन करनी होगी। हालांकि अच्छी बात ये होगी कि दुकानदार द्वारा पेमेंट होते ही इसे पूरी तरह डिलीट कर दिया जाएगा। और आपको एक टोकनाइजेशन लागू कर दिया जाएगा।

आखिर क्या है डेबिट, क्रेडिट कार्ड का टोकनाइजेशन
यदि आपको नहीं पता तो चलिए हम आपको बताते हैं कि आखिर टोकनाइजेशन है क्या। दरअसल टोकन सेवाओं के तहत कार्ड के माध्यम से लेनदेन की सुविधा के लिए एक यूनीक अल्टरनेटिव कोड तैयार किया जाएगा। जो ट्रांजकेशन 16-डिजिट कार्ड नंबर, कार्ड की एक्सपायरी डेट, सीवीवी और वन-टाइम पासवर्ड या ओटीपी बेस्ड होता है। लेकिन टोकनाइजेशन ओरिजिनल कार्ड नंबर को एक अल्टरनेटिव कोड के साथ बदलता। जिसे ‘टोकन’ कहा जाता है।

ये होगा फायदा —
इस टोकनाइजेशन से फायदा ये होगा कि ग्राहक के कार्ड की किसी भी प्रकार की डिटेल और जानकारी अब अन्य किसी भी व्यापारी, भुगतान गेटवे या तीसरे पक्ष तक नहीं पहुंच सकेगी। सबसे बड़ी बात इसके आने के बाद उपभोक्ताओं को अब अपने कार्ड की डिटेल को संभालने की जरूरत नहीं है। हर पेमेंट में कार्ड होल्डर को सहमति देनी होगी जो टोकन के लिए एकत्र की जाएगी।

इसलिए शुरू किया जा रहा है टोकनाइजेशन ?
वर्तमान समय में डिजिटल फ्रॉड बढ़ता जा रहा है। यानि डिजिटल पेमेंट को सुरक्षित करने, भारत जैसी किसी भी बड़े पेमेंट सिस्टम को सेफ, इकोनॉमिक डिजिटल पेमेंट बनाने के लिए टोकनाइजेशन को लाने का फैसला लिया गया है। आपको बता दें टोकनाइजेशन उच्च सुरक्षा मानकों के माध्यम से फाइल लेनदेन पर ऐसे कार्ड के लिए मानक बनाता है, जो मौजूदा रिवर्सिबल क्रिप्टोग्राफिक मानकों की तुलना में इम्यूटेबल है।

टोकेनाइज्ड लेनदेन को सुरक्षित क्यों माना जाता है

आपने अक्सर देखा होगा कि किसी प्रकार के लोन या फायनेंस कराने पर महीने की शुरुआत में ही कंपनी द्वारा अकाउंट से पैसा कट कर लिया जाता है। इस कंडीशन में एक टोकेनाइज्ड कार्ड को लेनदेन के लिए सुरक्षित माना जाता है। इससे लेनदेन की प्रक्रिया के दौरान ऑरिजनल कार्ड डिटेल किसी भी दुकानदार के साथ साझा नहीं की जाएगी। बल्कि टोकन बनाने के लिए पहले ग्राहक की सहमति जरूरी होगी। उससे ओटीपी मिलने के बाद ही भुगतान किया जा सकेगा।

कार्ड टोकन की समय सीमा
आपको बता दें कार्ड डिटेल को टोकन करने के लिए आरबीआई की पहली समय सीमा 30 जून, 2021 थी। पर कई व्यापारियों और भुगतान साझाकर्ताओं के साथ ही कार्ड कंपनियों और बैंकों के द्वारा अनुरोध किए जाने पर इसे बीते साल 31 दिसंबर, 2021 तक बढ़ा दिया गया था। इसके बाद एक बार फिर इसकी सीमा बढ़ा कर छह महीने तक कर दिया गया है। जिसके बाद इसे क्रेडिट और डेबिट कार्ड टोकन की समय सीमा 30 जून, 2022 तक हो गई है।

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