CAA Implementation Cg: छत्तीसगढ़ में 2700 से ज्यादा बांग्लादेशी 1600 पाकिस्तानी, इन रिफ्यूजी के पास 50 साल से नहीं है नागरिकता

CAA Implementation CG: ये लोग देश के नागरिक तो हैं लेकिन इन के पास नागरिकता नहीं है। कई लोगों के पास तो दस्तावेज भी नहीं है।

CAA Implementation Cg: छत्तीसगढ़ में 2700 से ज्यादा बांग्लादेशी 1600 पाकिस्तानी, इन रिफ्यूजी के पास 50 साल से नहीं है नागरिकता

   हाइलाइटस

  • 62 हजार 890 लोग नहीं हैं नागरिकता
  •  500 परिवार लेना चाहते है वीजा
  • गृह मंत्रालय ने जारी की रिपोर्ट

CAA Implementation Cg:  CAA लागू होने से छत्तीसगढ़ में करीब 63 हजार शरणार्थियों को फायदा होगा। शरणार्थी छत्तीसगढ़ में 50-60 साल से बसे हैं।

ये लोग देश के नागरिक तो हैं लेकिन इन के पास नागरिकता नहीं है। कई लोगों के पास तो दस्तावेज भी नहीं है। ये शरणार्थी रेसिडेंट परमिट या फिर वीजा लेकर रह रहे हैं।

   गृह मंत्रालय ने जारी की रिपोर्ट

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ऐसे ही शरणार्थी को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसके मुताबिक,  छत्तीसगढ़ में दिसंबर 2014  के पहले आए 62 हजार 890 लोग नागरिकता के बिना रह रहे हैं।

इनमें से ज्यादातर पाकिस्तानी और बांग्लादेशी शरणार्थी हैं। इनमें सबसे ज्यादा  रायपुर में 1625  पाकिस्तानी शरणार्थी हैं, जिनके पास रेसिडेंट परमिट और वीजा है।

1100 से ज्यादा बांग्लादेशी शरणार्थी हैं, जिनके पास दस्तावेज ही नहीं है, लेकिन अब ये रायपुर के मतदाता भी हो गए हैं। 1979 तक बस्तर में 18,458 शरणार्थी बसाए गए

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 31 अक्टूबर 1979 तक बस्तर इलाके में 18,458 शरणार्थियों को बसाया गया। इन शरणार्थियों के लिए सिंचाई, पेयजल आपूर्ति, जमीन सुधार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा, सड़क निर्माण जैसे विकास के कई काम किए गए। इसी तरह कांकेर के पंखाजूर में भी बांग्लादेशी शरणार्थियों को बसाया गया था।

इसी तरह रायपुर के माना में 500 से ज्यादा परिवार बराए गए थे, जिनकी संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है।

   500 परिवार लेना चाहते है वीजा

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पुलिस के मुताबिक रायपुर में 311 से ज्यादा विदेशी नागरिक हैं, जो वीजा पर आए हैं। ज्यादातर एजुकेशनल वीजा है तो,  कुछ टूरिस्ट वीजा पर आए हैं। उन्हें एक साल के लिए वीजा दिया जाता है।

हर साल वीजा की अवधि बढ़ाना पड़ता है, जबकि 1625 लोग रेसिडेंट परमिट पर रह रहे हैं।

2016 में 500 परिवार वीजा पर आए थे, जो परमिट लेकर रहने लगे हैं। अब नागरिकता लेना चाहते हैं।

पंखाजूर के 295 में से 133 गांवों में बांग्लादेशी शरणार्थी अब भी रहते हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक कांकेर की कुल 1.71 लाख की आबादी में से एक लाख लोग बांग्ला बोलते हैं।

वहीं, पंखाजूर शहर की कुल 10,201 लोगों की आबादी में करीब 95 फीसदी हिस्सा बांग्लादेश से आए लोगों का है।

   7 साल तक रहने के बाद मिलती है नागरिकता

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अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से डेढ़ महीने का वीजा लेकर लोग आते थे। इसके बाद और रहने के लिए वीजा के लिए आवेदन करते थे।

केंद्रीय गृह विभाग दस्तावेजों की जांच और पुलिस वेरिफिकेशन के बाद वीजा बढ़ाता था। बाद में दो साल का वीजा जारी होने लगा। लगातार 7 साल तक रहने के बाद नागरिकता दी जाती है।

   CAA के तहत नागरिकता पाने के लिए क्या करना होगा?

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CAA Implementation Cg के तहत नागरिकता हासिल करने के लिए, सरकार ने पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाया है। आवेदकों को वह साल बताना होगा, जब उन्होंने दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश किया था।

उन्हें ये साबित करना होगा कि वे पाकिस्तान, अफगानिस्तान या बांग्लादेश के निवासी हैं। इसके लिए वहां के पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, मार्कशीट या वहां की सरकार से जारी पहचान का कोई प्रमाण पत्र पेश करना होगा।

नागरिकता के आवेदनों पर एक समिति फैसला लेगी। इस समिति में जनगणना निदेशक, आईटी, फॉरेन रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस, पोस्ट ऑफिस और राज्य सूचना अधिकारी शामिल होंगे।

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सबसे पहले आवेदन जिला कमेटी के पास जाएगा। फिर उसे एंपावर्ड कमेटी को भेजा जाएगा।जनवरी 2019 में संयुक्त संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि 31 दिसंबर 2014 तक भारत।

जनवरी 2019 में संयुक्त संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि 31 दिसंबर 2014 तक भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश से 31,313 गैर-मुस्लिमों ने भारत में शरण ली है। यानी 31,313 लोग इस कानून के जरिए नागरिकता हासिल करने के योग्य होंगे।

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