जलते अंगारे भी आस्था के सामने फीके, नंगे पैर 8 फीट दहकती आग में चले भक्त, आज तक नहीं हुआ हादसा

जलते अंगारे भी आस्था के सामने फीके, नंगे पैर 8 फीट दहकती आग में चले भक्त, आज तक नहीं हुआ हादसा Burning embers also faded in front of faith, devotees walked barefoot 8 feet in the blazing fire, till date no accident happened

जलते अंगारे भी आस्था के सामने फीके, नंगे पैर 8 फीट दहकती आग में चले भक्त, आज तक नहीं हुआ हादसा

मंदसौर। भारत आस्था का देश है। आस्था के लिए देश में कई लोगों के हैरतंगेज कारनामों की खबरें सामने आती ही रहती हैं। ऐसी ही एक खबर प्रदेश के मंदसौर से सामने आई है। यहां नवरात्रि के मौके पर माता के लिए लोगों की आस्था के नजारे देखे जा रहे हैं। मंदसौर जिले के सीतामऊ के भगोर गांव में माता की विदाई के मौके पर भक्त नंगे पैर 8 फीट तक अंगारों पर चलते हैं। इस नजारे को देखने के लिए भी भक्तों की भीड़ लगती है। यहां मां के भक्त अंगारों पर चलकर अपनी भक्ती की परीक्षा देते हैं। इतना ही नहीं यह परंपरा करीब 100 सालों से चली आ रही है। जानकारी के मुताबिक यहां नवरात्रि के अंतिम दिन गरबा, रास और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके साथ ही नवमी के दिन यहां पूरे दिन हवन-पूजन का कार्यक्रम चलता है। इसके बाद शाम को चूल का आयोजन किया जाता है, जिसे ग्रामीण वाड़ी विसर्जन कहते हैं। इसमें ऐसे लोग अंगारों पर से चलते हैं, जिनकी मांगी हुई मन्नत पूरी हो जाती है।

देशी घी से दहकाए जाते हैं अंगारे...
बता दें कि यहां नवमी के दिन अंगारों पर चलने के लिए खास व्यवस्था की जाती है। इसके लिए भक्तों की एक टीम सुबह से ही तैयारी करना शुरू कर देती है। सुबह ही करीब 8 से 10 फीट का एक गड्ढा खोदा जाता है। इसके बाद इसमें सूखी लकड़ियां भरी जाती हैं। इन लकड़ियों पर देशी घी डाला जाता है। जब लकड़ियां अच्छा घी सोख लेती हैं फिर इनको आग लगाई जाती है। कुछ ही घंटों में ये लकड़ियां दहकते अंगारे बन जाती हैं। इसके बाद शाम को यह प्रोग्राम किया जाता है। इन अंगारों को पार कर भक्त अपनी आस्था की परीक्षा देते हैं। इतना ही नहीं मां की कृपा से बच्चे भी बेखौफ अंगारों को पार कर जाते हैं। यहां का इतिहास रहा है इन अंगारों को लेकर न तो आज तक कोई हादसा हुआ है और न ही कोई घायल हुआ है।

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