भाजपा ने बंगाल में प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत किसानों को पिछला बकाया देने का वादा किया

नंदीग्राम (पश्चिम बंगाल), आठ जनवरी (भाषा) भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने शुक्रवार को कहा कि उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल में सत्ता में आने के बाद यह सुनिश्चित करेगी कि राज्य के प्रत्येक किसान को प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत 18,000 रुपये की पिछली सहायता राशि भी मिले, जिससे वे ममता बनर्जी सरकार में वंचित रह गए थे।

भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रभारी विजयवर्गीय का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में केंद्रीय योजना के कार्यान्वयन के लिए अपनी सहमति दे दी। इस योजना के तहत किसानों को तीन समान किश्तों में प्रति वर्ष 6,000 रुपये मिलते हैं।

विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो द्वारा लिए गए फैसले को भाजपा के उस आरोप के जवाब के रूप में देखा जा रहा है कि उनकी पार्टी राज्य के किसानों को योजना का लाभ लेने से रोक रही है।

विजयवर्गीय ने पूर्वी मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘ममता बनर्जी सरकार के जाने और भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद बंगाल के किसानों को उनका हक मिलेगा।’

उन्होंने कहा कि उन्हें पिछले प्रत्येक साल के बकाया राशि के तौर पर 18000-18,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा, जो पहले ही देश के बाकी हिस्सों के किसानों के बैंक खातों में भेज दिया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कोयला और बालू खनन पर माफिया का नियंत्रण है और वे पशु तस्करी में लिप्त हैं।

उन्होंने कहा कि इस तरह के गिरोह में शामिल लोगों को भाजपा राज्य से बाहर कर देगी।

तृणमूल को ‘वायरस’ बताते हुए पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने रैली में कहा कि उनकी पार्टी इसका टीका है जो मई के बाद सत्तारूढ़ पार्टी को राज्य में सत्ता से बाहर कर देगी।

राज्य में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

यह दावा करते हुए कि भाजपा के पास पहले से ही पश्चिम बंगाल में 1.5 करोड़ सदस्य हैं, घोष ने कहा कि राज्य में भाजपा कार्यकर्ताओं को डराने के लिए उनके खिलाफ लगभग 29,000 मामले दर्ज किए गए हैं।

उन्होंने कहा, ‘पिछली वाम मोर्चा और मौजूदा तृणमूल कांग्रेस सरकार विकास करने में विफल रही है। भाजपा सुनिश्चित करेगी कि राज्य विकास के मार्ग में आगे बढ़े।’

भाषा कृष्ण अविनाश

अविनाश

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