Bird Flu in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में बर्ड फ्लू की दस्तक, बालोद जिले में दफनाई जाएंगी 10 हजार मुर्गियां

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Bird Flu in Chhattisgarh: बर्ड फ्लू ने छत्तीसगढ़ में भी दस्तक दे दी है। राज्य के बालोद जिले (Balod District) में बर्ड फ्लू के मामलों की पुष्टि हुई है। यहां गिधाली के दो पोल्ट्री फॉर्म में संक्रमण पाया गया है। संक्रमण की पुष्टि के बाद आज गिधाली के पोल्ट्री फॉर्म में मौजूद 10 हजार मुर्गियों को दफनाया जाएगा। बता दें कि, इससे पहले शुक्रवार को भी 2 हजार मुर्गियों को दफनाया गया था। राज्य में बर्ड-फ्लू का मामला सामने आने के बाद सभी जिलों को सतर्क कर दिया गया है।

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वहीं बालोद प्रशासन ने संक्रमित पोल्ट्री फॉर्म को सील कर दिया है। यहां किसी भी व्यक्ति के आने जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा फॉर्म के संचालक समेत 15 लोगों को होम आइसोलेशन में रहने के निर्देश दिए गए है।

शुक्रवार को प्रदेश के वेटनरी एंड सर्विसेज के एडिशनल डायरेक्टर ने संक्रमित क्षेत्र का दौरा किया था। पुलिस भी 10 किलोमीटर के दायरे में पैनी नजर रख रही है। यहां से गुजरने वाली सभी गाड़ियों की तलाशी ली जा रही है।

राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने गुरुवार को बताया था, राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान, भोपाल ने बालोद जिले से भेजे गए कुक्कुट के नमूने में बर्ड-फ्लू की पुष्टि की है। अधिकारियों ने बताया, राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान ने इसकी सूचना छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव तथा संचालक (पशु चिकित्सा सेवाएं) को दी है। राज्य में बर्ड-फ्लू का यह पहला मामला है।

उन्होंने बताया, बालोद जिले के गिधाली गांव स्थित जीएस पोल्ट्री फार्म में 150 मुर्गियों की मौत होने के बाद पांच नमूने इसी महीने की 11 तारीख को जांच के लिए राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान, भोपाल भेजे गए थे। जांच में सभी नमूनों में एच-5 एन-8 एविएन इनफ्लुएंजा वायरस की पुष्टि हुई है। नमूनों की ‘ट्रेकियल स्वाब’ और ‘क्लोकल स्वाब’ की रिपोर्ट भी पॉजिटिव पाई गई है।

राज्य के पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग के संचालक माथेश्वरन वी ने बताया, भारत सरकार के निर्देश के अनुसार संक्रमित फार्म से एक किलोमीटर की दायरे को संक्रमित क्षेत्र घोषित कर त्वरित प्रतिक्रिया दल (आरआरटी) द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने बताया, बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद दिशानिर्देशों के अनुसार पक्षियों को 10 फुट गहरे गड्ढे में मिट्टी में दबाया जाएगा। इसमें नमक और ब्लीचिंग पाउडर भी छिड़का जाएगा। गड्ढों को भरने के दौरान वायरस का प्रसार रोकने के लिए दवा का छिड़काव भी किया जाएगा।

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