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नई दिल्ली। डीजल से चलने वाली गाड़ियों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। सरकारी तेज कंपनी इंडियन ऑयल (Indian Oil) ने बायोडिजल को पेश किया है। इसे खाना पकाने के लिए इस्तेमाल किए गए तेल से बनाया गया है। बायोडीजल एक वैकल्पिक ईंधन है, जो पारंपरिक या फॉसिल डीजल की तरह ही होता है। इसे वनस्पति तेलों, एनिमल फैट, चरबी और वेस्ट कुकिंग ऑयल से बनाया जाता है।
धर्मेंद्र प्रधान ने दिखाई हरी झंडी
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इंडियन ऑयल के टिकरीकलां टर्मिलन, दिल्ली से आईओआई योजना के तहत UCO (Used Cooking Oil) आधारित बायोडीजल मिश्रित डीजल की पहली आपूर्ति को हरी झंडी दिखाई। UCO को बायोडीजल में परिवर्तित करने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के साथ पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 10 अगस्त, 2019 को विश्व जैव ईंधन दिवस के अवसर पर “प्रयुक्त खाद्य तेल से उत्पादित बायोडीजल” की खरीद के लिए अपनी दिलचस्पी व्यक्त की थी।
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भविष्य का इंधन है वायोडीजल
बतादें कि बायोडीजल जैविक स्रोतों से प्राप्त डीजल के जैसा ही गैर-परम्परागत ईंधन है। इसे नवीनीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से बनाया जाता है। यह परम्परागत ईंधनों का एक स्वच्छ विकल्प है। बायोडीजल में कम मात्रा में पट्रोलियम पदार्थ को मिलाया जाता है और विभिन्न प्रकार की गाडियों में प्रयोग किया जा सकता है। बायोडीजल इको फ्रेंडली है और इसे भविष्य का इंधन माना जा रहा है। इसकी सहायता से डीजल वाहनों को चलाने के लिए उनमे किसी प्रकार का तकनीकी परिवर्तन भी नही करना पड़ता है। साथ ही यह सबसे आसान इंधनों में से एक है और सबसे अच्छी बात यह है कि यह खेती में काम आने वाले उपकरणों को चलाने के लिये सबसे उपयुक्त है।
आत्मनिर्भर भारत की ओर एक और कदम
सरकार के इस फैसले को स्वच्छ और आत्मनिर्भर भारत की ओर एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही इंडियन ऑयल ने उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश में आठ बायोडीजल संयंत्रों का निर्माण भी शुरू कर दिया है। यह भारत के जैव ईंधन के क्षेत्र में एक मील का पत्थर है और इसका पर्यावरण पर सकारात्मक असर पड़ेगा। यह पहल स्वदेशी बायोडीजल आपूर्ति को बढ़ाने, आयात निर्भरता कम करने और ग्रामीण रोजगार को पैदा करके राष्ट्र को पर्याप्त आर्थिक लाभ प्रदान करेगी।
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