Bilaspur: मां का अनोखा मंदिर, यहां प्रसाद में चढ़ाए जाते हैं कंकड़, पत्थर

Bilaspur: मां का अनोखा मंदिर, यहां प्रसाद में चढ़ाए जाते हैं कंकड़, पत्थर Bilaspur: Unique temple of mother, here pebbles, stones are offered in prasad nkp

Bilaspur: मां का अनोखा मंदिर, यहां प्रसाद में चढ़ाए जाते हैं कंकड़, पत्थर

बिलासपुर। एमपी अजब है, सबसे गजब है ये स्लोगन तो आपने सुना ही होगा। दरअसल, मध्य प्रदेश में ऐसे कई रीति-रिवाज और परम्पराएं हैं जो इस राज्य को बाकी राज्यों से अलग बनाती है। लेकिन कभी मध्य प्रदेश का हिस्सा रहे छत्तीसगढ़ भी इस मामले में कम नहीं है। यहां बिलासपुर शहर से लगे खमतराई में वनदेवी का एक अनोखा मंदिर है। जहां माता को प्रसाद में नारियल, फूल, पूजा सामग्री का चढ़ावा नहीं चढ़ाया जाता। बल्कि यहां प्रसाद के रूप में मां को कंकड़, पत्थर चढाया जाता है।

सदियों से किया जा रहा है इसका पालन

स्थानीय लोग इस परंपरा का सदियों से पालन करते आ रहे हैं और पांच पत्थर का चढ़ावा चढ़ाकर माता से मन्नत मांगते हैं। बतादें कि सदियों से इस मंदिर में भक्त फूल, माला और पूजन सामग्री लेकर नहीं आते। बल्कि पांच पत्थर से ही मां को खुश करते हैं। मान्यता है कि अगर श्रद्धालु मां वनदेवी के मंदिर में सच्चे मन से पांच पत्थर चढ़ाते हैं तो उनकी
मनोकामना जरूर पूरी होती है। मन्नत पूरी होने के बाद भी श्रद्धालुओं को पांच कंकड़ या पत्थर जरूर चढ़ाना पड़ता है।

इस खास पत्थर को चढ़ावे में चढ़ाया जाता है

हालांकि, खास बात यह है कि मां वनदेवी के मंदिर में कोई भी पत्थर चढ़ावे के रूप में नहीं चढ़ाया जा सकता, बल्कि खेतों में मिलने वाला गोटा पत्थर ही बस चढ़ावे में चढ़ाया जाता है। मंदिर के पुजारी अश्वनी तिवारी बताते हैं छत्तीसगढ़ में इस पत्थर को चमरगोटा कहा जाता है और बस यही पत्थर चढ़ावे के रूप में चढ़ाया जाता है। मंदिर की इस अनोखी परम्परा के बारे में जानकर श्रद्धालु दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं।

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