CG News: अपराधों से बदनाम रहे जुहली में अब चलता है लेडी कमांडो का कानून, नशा-हिंसा पर 10 साल से ब्रेक, नहीं हुई 1 भी FIR

Chhattisgarh Juhli Women Commandos: बिलासपुर से 35 किलोमीटर दूर नशे और विवादों के लिए बदनाम जुहली गांव अब छत्तीसगढ़ राज्य का एक शांति का टापू बन चुका है। यहां नशेड़ियों की एंट्री पर पूरी तरह से रोक है।

Juhli Women Commandos

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बिलासपुर से अमन पांडेय की रिपोर्ट...

Chhattisgarh Juhli Women Commandos: बिलासपुर से 35 किलोमीटर दूर नशे और विवादों के लिए बदनाम जुहली गांव अब छत्तीसगढ़ राज्य का एक शांति का टापू बन चुका है।

यह तस्वीर बदली है गांव की उन 300 महिलाओं की वजह से, जिनका गांव में अपना एक अलग ही कानून चलता है। यहां नशेड़ियों की एंट्री पर पूरी तरह से रोक है। हर हफ्ते गांव की चौपाल पर बैठक होती है, जहां शराबबंदी, बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है।

नहीं खलने देती पुलिस की कमी

इन महिलाओं के पास ना कोई लाठी है, ना कोई अधिकार पत्र, लेकिन फिर भी यह पुलिस की कमी खलने नहीं देती। गांव की रक्षा के लिए महिलाएं नियमित गश्त कर रही हैं। उनके इस कदम को पुलिस ने भी सराहा और उन्हें महिला कमांडो का दर्जा दिया।

[caption id="attachment_854003" align="alignnone" width="933"]Chhattisgarh Juhli Women Commandos 300 महिला कमांडो गांव में गश्त करती हैं।[/caption]

नशा मुक्त किया तो सुधरी शिक्षा

महिला कमांडो लीलाबाई पोर्ते कहती हैं कि गस्त कर महिलाओं ने गांव को नशा मुक्त किया है। इससे बच्चों की शिक्षा सुधरी है। गांव की रक्षा खुद कर रहे हैं। महिला कमांडो संतोषी बाई विनायक ने बताया महिलाओं के प्रयास देखकर पुलिस का भी सहयोग मिल रहा है। जिसके बाद उन्होंने महिला कामंडो का दर्जा दिया गया। महिला कमांडो शकुंतला उईके ने कहा कि हम नशा कर आने वालों को पकड़कर समझाते है। नहीं समझने वालों को गांव से बाहर कर देते हैं।

हर पर्व में खून-खराब, अब नहीं

स्थानीय चंद्रशेखर कहते हैं कि पहले आए दिन युवा नशे की चपेट में आ रहे थे। जिससे गांव में विवाद की स्थिति बनती थी लेकिन ऐसा माहौल नहीं है। स्थानीय ज्योति कुमार गंधर्व ने कहा कि पहले पर्व के दौरान लड़ाई-झगड़ते, खून-खराबा होता रहता था लेकिन महिला कमांडो बनने के बाद से शांति है।

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कमांडो को पंचायत का सहयोग

उप सरपंच रवि सिंह मरावी कहते हैं कि गांव में पिछले कुछ सालों से अब शांति का माहौल है। यहां लड़ाई-झगड़ा नहीं होता है। पंचायत की ओर से महिला कमांडो का पूरा सहयोग कर रहे हैं। चोरी सहित अन्य घटनाओं में भी कमी आई है।

पुलिस ने दिया कमांडो का दर्जा

सीपत थाना प्रभारी गोपाल सतपति ने बताया कि महिलाएं संगठित हैं। उनमें कुछ कर गुजरने की इच्छा है। सभी इकट्ठा गांव को नशा मुक्त कराया है। आस-पास के गांवों के लिए मिसाल बनकर उभरी है। पुलिस की ओर से उन्हें महिला कमांडो का दर्जा दिया है।

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