Bilaspur High Court: 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षाओं से निजी स्कूलों को मिली राहत, अभिभावक संघ ने दायर की थी याचिका

Bilaspur High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने 5वीं और 8वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। इस आदेश से निजी स्कूल प्रबंधन को बड़ी राहत मिली है।

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Bilaspur High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने 5वीं और 8वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। इस आदेश से निजी स्कूल प्रबंधन को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि इस सत्र के लिए निजी स्कूलों में केंद्रीकृत परीक्षाएं आयोजित न की जाएं। फिलहाल, यह राहत केवल 2024-25 सत्र के लिए दी गई है। अगले साल के लिए सरकार और संबंधित पक्षों को नए नियम बनाने होंगे।

निजी स्कूलों को मिली राहत, सरकारी स्कूलों में होगी परीक्षा

बिलासपुर हाईकोर्ट (Bilaspur High Court) के फैसले के अनुसार, इस वर्ष केवल सरकारी स्कूलों के छात्रों को बोर्ड परीक्षा देनी होगी, जबकि निजी स्कूलों को इससे छूट दी गई है। कोर्ट ने यह राहत केवल 2024-25 सत्र के लिए दी है, जिससे निजी स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है।

प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई

दरअसल, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) ने इस सत्र से 5वीं और 8वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं आयोजित करने का आदेश जारी किया था। यह निर्णय निजी स्कूलों और अभिभावकों के लिए चिंता का विषय बन गया, क्योंकि इससे पहले इन कक्षाओं की परीक्षाएं स्कूल स्तर पर आयोजित की जाती थीं। निजी स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों ने इस आदेश को चुनौती देते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 

राज्य सरकार को निर्देश

इस मामले में जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह इस वर्ष के लिए निजी स्कूलों में बोर्ड परीक्षा आयोजित न करे। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य सरकार अब निजी स्कूलों में 5वीं और 8वीं की बोर्ड परीक्षाएं आयोजित नहीं कर सकेगी। हालांकि, सरकारी स्कूलों के छात्रों को परीक्षा देनी होगी।

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निजी स्कूलों और अभिभावकों की प्रतिक्रिया  

निजी स्कूल प्रबंधन और अभिभावक संघ ने हाईकोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे छात्रों और अभिभावकों पर अनावश्यक दबाव कम होगा। निजी स्कूलों ने यह भी बताया कि वे पहले से ही सीजी समग्र और मूल्यांकन पैटर्न पर छात्रों को पढ़ा रहे हैं, और बोर्ड परीक्षा का आदेश उनके लिए अतिरिक्त बोझ था। 

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