कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह की रिहाई की पूरी कहानी, जानिए कैसे बंसल न्यूज संवाददाता ने उन्हें नक्सलियों के चंगुल से रिहा कराया

Bijapur Naxal atta

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ के दौरान अगवा किए गए कोबरा जवान राकेश्वर सिंह मनहास को नक्सलियों ने छोड़ दिया है। कोबरा जवान मनहास छह दिनों से नक्सलियों के कब्जे में थे। रिहा होने के बाद जवान ने अपनी कैद की कहानी बताई है। आजाद होने के बाद उन्होंने मीडिया से बाताया कि कैसे मुठभेड़ के दौरान वे नक्सलियों के कब्जे में चले गए थे।

जवान से आत्मसमर्पण करने को कहा गया था

गौरतलब है कि 3 अप्रैल को बीजापुर जिले के टेकलगुड़ा और जोनागुड़ा गांव के पास सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में 22 जवान शहीद हो गए थे। जबकि इस हमले में 30 से अधिक जवान घायल हुए थे। वहीं राकेश्वर ने रिहा होने के बाद बताया कि एंबुश में फंसने के बाद नक्सलियों ने उनसे आत्मसमर्पन करने को कहा था। जब उन्होंने समर्पण कर दिया इसके बाद उन्हें कहां ले जाया गया उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। क्योंकि उनकी आंखों पर पट्टी बांधी दी गई थी।

जवान को लाने के लिए बंसल न्यूज संवाददाता ने की कड़ी मेहनत

मनहास ने बताया कि जब तक वे नक्सलियों के कब्जे में रहे नक्सली स्थानीय बोली में आपस में बात किया करते थे। इस कारण से उन्हें नक्सलियों की भाषा समझ नहीं आ रही थी। बतादें कि राकेश्वर सिंह को पकड़ने के बाद नक्सलियों ने पर्चा जारी करके राज्य सरकार से मध्यस्थता करने की मांग की थी। जिसके बाद बस्तर के गांधीवादी कार्यकर्ता और पद्मश्री से सम्मानित धर्मपाल सैनी और गोंडवाना समाज के प्रमुख मुरैया तरेम समेत 7 सदस्यी पत्रकार दल जंगल गए थे। 7 सदस्यी पत्रकार दल में बंसल न्यूज संवाददाता चेतन कापेवार भी शामिल थे। चेतन ने बताया कि नक्सलियों ने सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकारों से बातचीत के बाद जनअदालत लगाकर जवान को रिहा कर दिया।

नक्सलियों ने 20 गांवों से आदिवासियों को बुलाकर लगाई थी जनअदालत

रिहाई के बाद बंसल न्यूज संवाददाता चेतन कापेवार ने जवान राकेश्वर सिंह मनहास को बाइक से तर्रेम कैंप लाकर सीआरपीएफ के डीआइजी कोमल सिंह को सौंपा दिया। बतादें कि जवान की रिहाई के पहले नक्सलियों की पामेड़ एरिया कमेटी ने गुरुवार को टेकलमेटा गांव के पास जंगल में 20 गांवों से आदिवासियों को बुलाकर जनअदालत लगाई थी। भारी भीड़ के बीच नक्सलियों ने जवान को मुठभेड़ के छह दिन बाद समाजिक कार्यकर्ता और बंसल संवाददाता चेतन कापेवार के हवाले कर दिया। रिहा होते ही राकेश्वर ने सबसे पहले नम आंखों से मीडिया कर्मियों को गले लगा लिया।

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