छठे दौर की स्पेक्ट्रम नीलामी के लिये एक मार्च से होगी बोली शुरू: दूरसंचार विभाग ने जारी किया नोटिस

नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) स्पेक्ट्रम नीलामी के छठे दौर में 3.92 लाख करोड़ रुपये की रेडियोतरंगों के लिये बोलियां लगाने की प्रक्रिया एक मार्च से शुरू होंगी। दूरसंचार विभाग द्वारा बुधवार को जारी नोटिस में यह जानकारी दी गयी है।

इस स्पेक्ट्रम नीलामी की लंबे समय से प्रतीक्षा की जा रही थी। यह नीलामी चार साल बाद होने जा रही है और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) द्वारा आधार मूल्य की गणना व सुझाव दिये जाने के दो साल बाद यह नीलामी होगी।

दूरसंचार विभाग ने ट्राई से मिले सुझाव की तुलना में कुछ सर्किलों में चुनिंदा स्पेक्ट्रम बैंड की आधार दरों में बदलाव किया है।

दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने बोली-पूर्व सम्मेलन के लिये 12 जनवरी का समय तय किया है। नोटिस पर किसी भी मुद्दे को लेकर 28 जनवरी तक स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। नीलामी में भाग लेने के लिये दूरसंचार सेवा प्रदाताओं को पांच फरवरी तक आवेदन करना होगा।

नोटिस के अनुसार, बोलीदाताओं की अंतिम सूची की घोषणा 24 फरवरी 2021 को होगी और नीलामी प्रक्रिया एक मार्च से शुरू होगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 17 दिसंबर 2020 को सात आवृति के बैंड में 3.92 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 2,251.25 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की नीलामी को मंजूरी दे दी थी। इस दौर में 700 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 2100 मेगाहर्ट्ज, 2300 मेगाहर्ट्ज और 2500 मेगाहर्ट्ज में ट्राई द्वारा सुझाये गये आधार मूल्य पर नीलामी को मंजूरी दी गई।

सरकार ने हालांकि, 3300-3600 मेगाहर्ट्ज बैंड को इस बार की नीलामी से बाहर रखा है। उद्योग जगत इस फ्रीक्वेंसी यानी आवृति को 5जी सेवाओं के लिये उपयुक्त बताता रहा है। यह बैंड भी ट्राई के सुझावों में शामिल थे।

जो बोलीदाता 700 मेगाहर्ट्ज बैंड के विकल्प को चुनेंगे, उन्हें प्रीमियम श्रेणी के इस स्पेक्ट्रम बैंड को पूरे देश के लिये खरीदने के लिये 32,905 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।

दूरसंचार विभाग ने 700 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज और 2300 मेगाहर्ट्ज बैंड को सभी 22 दूरसंचार सर्किलों के लिये उपलब्ध कराया है। इनके अलावा 1800 मेगाहर्ट्ज बैंड 21 सर्किलों, 900 व 2100 मेगाहर्ट्ज 19-19 सर्किलों और 2500 मेगाहर्ट्ज 12 सर्किलों के लिये उपलब्ध हैं।

एकमुश्त भुगतान करने का विकल्प चुनने वाले सफल बोलीदाता को परिणाम जारी होने के 10 दिन के भीतर कुल भुगतान करना होगा। विलंबित भुगतान का विकल्प चुनने वालों को 1800 मेगाहर्ट्ज, 2100 मेगाहर्ट्ज, 2300 मेगाहर्ट्ज और 2500 मेगाहर्ट्ज की स्थिति में कुल भुगतान का 50 प्रतिशत तथा 700 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज और 900 मेगाहर्ट्ज की स्थिति में कुल भुगतान का 25 प्रतिशत 10 दिन के भीतर जमा करना होगा। शेष राशि जमा करने के लिये 16 बराबर किस्तों की सुविधा मिलेगी, जिसमें किस्तों के भुगतान से दो साल की छूट का विकल्प भी शामिल होगा।

सफल बोलीदाताओं को बोली राशि के अलावा तीन प्रतिशत समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का भुगतान भी करना होगा, जिसमें वायरलाइन शुल्क शामिल नहीं होगा।

दूरसंचार उद्योग के संगठन सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने कहा कि स्पेक्ट्रम से दूरसंचार कंपनियों को डेटा के बढ़े इस्तेमाल की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। हालांकि, यदि रेडियोतरंगों के आधार मूल्य कम होते तो कंपनियों को नेटवर्क में अतिरिक्त निवेश करने का प्रोत्साहन मिलता।

सीओएआई के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल एसपी कोचर ने कहा, ‘‘सरकार ने अधिक स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराने की जरूरत को पूरा किया है, लेकिन यदि स्पेक्ट्रम की आधार दरें कम होतीं तो दूरसंचार कंपनियों को नेटवर्क विस्तार के लिये अधिक संसाधन मिल पाता। पहले भी अधिक आरक्षित मूल्य का यह परिणाम देखने को मिला है कि काफी स्पेक्ट्रम बिना बिके रह गये।’’

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि स्पेक्ट्रम की इस नीलामी में 30 हजार से 50 हजार करोड़ रुपये के बीच की बोलियां प्राप्त होने वाली हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां नये स्पेक्ट्रम में दिलचस्पी लेने के बजाय पुराने स्पेक्ट्रम का नवीनीकरण कराने पर ही ध्यान देंगी। वोडाफोन आइडिया कुछ सर्किलों में अपने मौजूदा स्पेक्ट्रम के नवीनीकरण के लिये भी बोली लगाने से दूर रह सकती है।

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इक्रा ने कहा, उसे नहीं लगता है कि 700 मेगाहर्ट्ज श्रेणी में कोई उल्लेखनीय बोली प्राप्त होने वाली है। एजेंसी का अनुमान है कि बोलियां 55 हजार से 60 हजार करोड़ रुपये के बीच में रहेंगी।

भाषा

सुमन महाबीर

महाबीर

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