भुवनेश्वर: प्रसिद्ध मारीचि ‘कुंड’ से निकाले गए पवित्र जल का घड़ा 1.30 लाख रुपये में बिका, जानें क्या है मान्यता

भुवनेश्वर। कुछ लोग इसे अंधविश्वास कह सकते हैं, कुछ इसे एक व्यावसायिक अवसर के रूप में देख सकते हैं, लेकिन यहां भगवान लिंगराज के वार्षिक रुकुन रथ उत्सव की पूर्व संध्या पर आयोजित एक नीलामी में मुक्तेश्वर मंदिर में स्थित प्रसिद्ध मारीचि ‘कुंड’ से निकाले गए पवित्र जल का पहला घड़ा 1.30 लाख रुपये में बिका। मारीचि कुंड के पास पवित्र जल की नीलामी शुक्रवार की रात की गई।

श्रद्धालुओं की ऐसी मान्यता है कि पवित्र जल में स्नान करने से प्रजनन संबंधी समस्याओं का समाधान होता है। नीलामी भगवान लिंगराज मंदिर के सेवकों के एक समूह बोडु निजोग द्वारा आयोजित की गई। भुवनेश्वर के बारामुंडा क्षेत्र निवासी एक युगल ने सबसे ज्यादा कीमत लगाई और उन्हें 1.30 लाख रुपये में जल का पहला घड़ा मिला, जबकि आधार मूल्य सिर्फ 25,000 रुपये था। इसी तरह, जल के दूसरे घड़े को 16,000 रुपये के आधार मूल्य के मुकाबले 47,000 रुपये में नीलाम किया गया, जबकि तीसरे घड़े को 13,000 रुपये में खरीदा गया। पहले तीन युगलों को पवित्र जल प्राप्त होने के बाद, बदू निजोग ने बिना किसी मांग के गरीब युगलों के बीच अन्य घड़े वितरित किए।

एक सेवक ने कहा कि जल की नीलामी प्रक्रिया, जो लंबे समय से चल रही है, पिछले दो वर्षों से कोविड-19 महामारी के कारण आयोजित नहीं की जा सकी। पहले घड़े के खरीदारों ने कहा कि उनका परिवार मारीचि कुंड का पवित्र जल खरीदने के लिए 2.5 लाख रुपये तक देने को तैयार है। प्रख्यात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर संतोष मिश्रा ने कहा, ‘‘इस जल को लेकर इस तरह के विश्वास के पीछे कोई वैज्ञानिक कारण नहीं है। हम नहीं मानते कि पानी के घड़े से नहाने से मनुष्य की प्रजनन क्षमता में वृद्धि होगी। साथ ही, मैं इस बात से भी इनकार नहीं करता कि पानी में कुछ (अन्य) औषधीय गुण हो सकते हैं क्योंकि मारीचि कुंड कई अशोक के पेड़ों से घिरा हुआ है, जिनकी जड़ें तालाब में समाप्त होती हैं।’’

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