Bhopal Udit Pitai Death Case: DSP के साले की हत्या के आरोपी दोनों आरक्षकों को जेल भेजा, पुलिस ने नहीं मांगी रिमांड

Bhopal Udit Pitai Death Case: DSP के साले की हत्या के आरोपी दोनों आरक्षकों को जेल भेजा, पुलिस ने नहीं मांगी रिमांड

हाइलाइट्स

  • पुलिस की पिटाई से डीएसपी के साले की मौत का मामला।
  • आरोपी दोनों पुलिस आरक्षक कोर्ट में पेश, भेजा गया जेल।
  • पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पैनक्रियाज पर गंभीर चोटें बताई गईं।

Bhopal Udit Gayaki Pitai Death Case Police constables arrested: राजधानी भोपाल में बालाघाट डीएसपी चेतन अडलक के साले और सॉफ्टवेयर इंजीनियर उदित गायकी की हत्या के मामले में पुलिस ने दो आरक्षक संतोष बामनिया और सौरभ आर्य को गिरफ्तार किया है। रविवार को दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां पुलिस ने रिमांड नहीं मांगी जिसके बाद कोर्ट ने आरोपियों को सीधे जेल भेज। इन दोनों को नकाब में पेश किया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि युवक के पैनक्रियाज को गंभीर चोट लगी थी। पिपलानी थाने में दर्ज FIR में पुलिसकर्मियों द्वारा पिटाई का जिक्र नहीं है, जिससे विवाद बढ़ गया है।

मामले में पुलिस पर पक्षपात के आरोप

पिपलानी पुलिस ने एम्स के पांच डॉक्टरों के पैनल की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर हत्या का केस दर्ज तो कर लिया है, लेकिन अब वही पुलिस डॉक्टरों से इस बात का स्पष्टीकरण मांग रही है कि कैसे साबित होता है कि पैंक्रियाज में आई चोट पुलिस पिटाई की वजह से ही हुई। अब इस मामले में मामले में पुलिस पर पक्षपात के आरोप लगे हैं।

इस सवाल के बाद पुलिस की नियत पर सवाल खड़े होने लगे हैं। माना जा रहा है कि थाना पुलिस दोनों आरोपी आरक्षकों को बचाने की कोशिश में जुटी है। मामले में दोनों आरोपी आरक्षक संतोष बामनिया और सौरभ आर्य को शनिवार रात गिरफ्तार किया गया था। मुख्यमंत्री और डीजीपी की सख्ती के बाद दोनों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया और पहले ही शुक्रवार को दोनों आरक्षकों को सस्पेंड भी कर दिया गया था।

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दोनों आरक्षकों ने की थी उदित की पिटाई

20 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर उदित गायकी के साथ मारपीट की वारदात पिपलानी थाना क्षेत्र स्थित इंद्रपुरी सी-सेटर में श्रेयस कोचिंग सेंटर के पास गुरुवार-शुक्रवार की रात लगभग सवा एक बजे हुई थी। गुरुवार रात पिपलानी थाने में पदस्थ आरक्षक संतोष बामनिया और सौरभ आर्य ने उदित गायकी की डंडे से बेरहमी से पिटाई की थी।

पिटाई का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आ चुका है। मारपीट के बाद उदित बेहोश हो गया। उसके दोस्तों ने उसे एम्स अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया कि उदित के शरीर पर 16 गंभीर चोटों के निशान थे और पैंक्रियाज डैमेज के चलते उसकी मौत हुई। मृतक उदित का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें वह सड़क पर डांस करते दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो आरक्षकों द्वारा डंडों से पिटाई से चंद मिनट पहले का है।

एफआईआर में 'पिटाई' का जिक्र तक नहीं

चौंकाने वाली बात यह है कि इस गंभीर घटना की एफआईआर में पुलिस पिटाई का कोई जिक्र ही नहीं है। एफआईआर में आरक्षक संतोष और सौरभ का पक्ष दर्ज है, जिसमें उन्होंने बताया कि रात करीब डेढ़ से दो बजे के बीच इंद्रपुरी इलाके में एक लाल रंग की कार संदिग्ध हालात में खड़ी थी। उसमें दो लड़के बैठे थे और एक बाहर खड़ा था तीनों तौर पर नशे में थे।

कॉन्स्टेबल संतोष बामनिया ने बताया पूछताछ के दौरान एक लड़के ने बदतमीजी की, जबकि बाहर खड़ा लड़का भाग गया। उसे पकड़ने के प्रयास में वह गिर पड़ा और गाली-गलौच करने लगा। बामनिया ने दावा किया कि उसने वर्दी उतरवाने की धमकी भी दी। इस पर "हल्का बल प्रयोग" किया गया और फिर उसे दोस्तों के हवाले कर दिया गया। सुबह उसकी मौत की सूचना मिली।

वहीं, इस घटना से पहले उदित का अपने दोस्तों के साथ मस्ती करते हुए एक वीडियो भी सामने आया है, जिससे यह साबित होता है कि वह पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य स्थिति में था।

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FIR में जिक्र, आरक्षक संतोष ने डंडे से मारा

FIR में उल्लेख है कि घटना स्थल के CCTV फुटेज में ऐसी स्थिति उभर कर आई है जिसमें आरक्षक संतोष को उदित पर डंडे से हमला करते हुए देखा गया।

FIR के अनुसार, मृतक की दोस्त दीपेश ने बताया कि वे सीहोर से भोपाल लौट रहे थे और रास्ते में बीयर पी रहे थे। अमन सरिया के पास अन्य दोस्तों को बुलाया गया। देर रात इंद्रपुरी पहुंचे, जहाँ पहले से कुछ दोस्त मौजूद थे। उन्होंने आगे बताया कि लाल रंग की i10 कार में जोर से गाने बजाते हुए घूम रहे थे।

अचानक दो पुलिसकर्मी उस स्थान पर पहुंचे। उदित डरा और भागने लगा। पुलिसकर्मी ने उसका पीछा किया। उसके बाद अक्षत ने उदित को अपनी कार में बैठाया और वहां से ले गया। रास्ते में उदित की तबीयत बिगड़ने लगी, जिस पर उसे पहले सांई अस्पताल ले गए, फिर एम्स भेजा गया। एम्स में पहुंचते ही उसे मृत घोषित कर दिया गया।

मृतक के परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उसके दोस्तों को दबाव में बयान लिखवाए हैं। FIR में मारपीट और अभद्रता का जिक्र नहीं किया गया, ताकि आरोपी पुलिसकर्मियों को राहत मिल सके।

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