संपत्ति कर जमा होने के बावजूद दोहरी वसूली, भोपाल नगर निगम कमिश्नर पर 10 हजार का जुर्माना

Bhopal Municipal Corporation Commissioner Property Tax Case Update भोपाल में नगर निगम द्वारा संपत्ति कर की दोहरी वसूली का मामला सामने आया है, जिसमें निगम पर उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) ने 10,000 रुपए का जुर्माना लगाया है।

संपत्ति कर जमा होने के बावजूद दोहरी वसूली, भोपाल नगर निगम कमिश्नर पर 10 हजार का जुर्माना

हाइलाइट्स

  • भोपाल नगर निगम ने साल 2020-21 का संपत्ति कर दो बार वसूला
  • उपभोक्ता फोरम ने कमिश्नर पर 10,000 रुपए का हर्जाना लगाया
  • योगिता दीक्षित को मानसिक कष्ट और वाद-व्यय के लिए 5,000-5,000 रुपए

Bhopal Municipal Corporation Commissioner Property Tax Case: भोपाल में नगर निगम द्वारा संपत्ति कर की दोहरी वसूली का मामला सामने आया है, जिसमें निगम पर उपभोक्ता फोरम (Consumer Forum) ने 10,000 रुपए का जुर्माना लगाया है। यह मामला कोलुआकला की रहने वाली योगिता दीक्षित का है, जिनके दो मंजिला मकान का साल 2020-21 का संपत्ति कर पहले ही जमा हो चुका था। बावजूद इसके, उनसे दोबारा संपत्ति कर वसूला गया।

संपत्ति कर की दोहरी वसूली

योगिता दीक्षित ने साल 2020-21 में अपने मकान का संपत्ति कर 1,697 रुपए जमा कराए थे, लेकिन साल 2021-22 के लिए नगर निगम के नागरिक सेवा केंद्र ने उनसे 3,933 रुपए की मांग की। नागरिक सेवा केंद्र का तर्क था कि साल 2020-21 का कर जमा नहीं हुआ है, हालांकि योगिता ने जमा रसीद दिखा दी थी।

इसके बावजूद उन्हें अधिक राशि जमा कराई गई। शिकायत करने पर निगम ने आश्वासन दिया कि जमा की गई अतिरिक्त राशि अगले साल समायोजित (Adjusted) कर दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

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योगिता ने उपभोक्ता फोरम में की शिकायत

योगिता ने इसके बाद उपभोक्ता फोरम में मामला दर्ज कराया। फोरम की बेंच-2 की अध्यक्ष गिरिबाला सिंह ने मामले की सुनवाई करते हुए निगम कमिश्नर पर 10,000 रुपए का हर्जाना लगाने का आदेश दिया। इसमें 5,000 रुपए मानसिक कष्ट (Mental Distress) के लिए और 5,000 रुपए वाद-व्यय (Litigation Expenses) के रूप में तय किए गए। बाद में, नगर निगम ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज होने के बाद अधिक वसूली गई राशि को अगले साल समायोजित कर दिया।

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उपभोक्ता फोरम क्या है?

उपभोक्ता फोरम एक ऐसी जगह है जहां किसी दुकान, कंपनी या सेवा देने वाले द्वारा धोखा देने, खराब सामान देने या ठीक से सेवा न देने पर शिकायत की जाती है। यहां बिना ज्यादा खर्च और कम कागजी झंझट के मामले सुने जाते हैं और जरूरत पड़े तो पैसे वापस, मरम्मत/बदलाव या मुआवजा दिलाया जा सकता है।

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