Bhopal Police Custody Death Case: भोपाल जेल में विचाराधीन कैदी की मौत का मामला, जेलर, टीआई, डॉक्टर समेत 8 पर होगी FIR

Bhopal Police Custody Death Case: भोपाल में पुलिस कस्टडी में मौत के मामले में जेलर, टीआई, डॉक्टर समेत 8 के खिलाफ FIR होगी।

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हाइलाइट्स

  • पुलिस कस्टडी में कैदी की मौत
  • 8 के खिलाफ FIR के आदेश
  • भोपाल जेल में गई थी कैदी की जान

Bhopal Police Custody Death Case: भोपाल जेल में विचाराधीन कैदी की संदिग्ध मौत के मामले में तत्कालीन जेलर, टीआई, डॉक्टर और क्राइम ब्रांच के 5 कॉन्स्टेबल के खिलाफ FIR होगी। इसका आदेश जारी किया गया है। ग्वालियर के जेएएच अस्पताल में इलाज के दौरान बंदी मोहसिन की मौत हुई थी। वो भोपाल का रहने वाला था।

जांच के बाद FIR का आदेश

विचाराधीन बंदी मोहसिन की मां ने कोर्ट में प्राइवेट कम्प्लेंट दर्ज की थी। जज वीरेंद्र यादव ने इस मामले की जांच की थी। इसके बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनीष मिश्रा की कोर्ट ने FIR का आदेश दिया है।

परिजन का आरोप

वकील आमिर उल्ला खान ने बताया कि मोहसिन के परिजन का आरोप था कि 3 जून 2015 को क्राइम ब्रांच भोपाल के सिपाही मुरली, दिनेश खजूरिया और चिरोंजी पूछताछ के लिए ले गए थे। जब वे मोहसिन को छुड़ाने क्राइम ब्रांच थाने पहुंचे तो उनसे 2 लाख रुपए की घूस मांगी गई थी।

क्राइम ब्रांच और टीटी नगर थाने में मोहसिन के साथ मारपीट

क्राइम ब्रांच के बाद पुलिस ने मोहसिन खान पर टीटी नगर थाने में लूट का झूठा केस लगाकर कोर्ट में पेश किया। इसके बाद जेल भेज दिया था। क्राइम ब्रांच और टीटी नगर थाने में उसके साथ मारपीट की गई थी।

प्राइवेट पार्ट में लगाया गया था करंट

मेडिकल रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई थी कि मोहसिन खान के प्राइवेट पार्ट में करंट लगाया गया था। परिजन ने जेल में भी जेलर पर मोहसिन से मारपीट करने के आरोप लगाए थे।

3 बार सेशन कोर्ट ने लोअर कोर्ट में जांच के लिए भेजा केस

मृतक मोहसिन खान की मां सीमा खान की ओर से पैरवी वकील यावर खान ने की थी। इस मामले में पहले 3 बार न्यायिक मजिस्ट्रेट ने हत्या और सबूत मिटाने का मामला दर्ज किया था। 3 बार सेशन कोर्ट ने केस वापस लोअर कोर्ट में दोबारा जांच के लिए भेजा था।

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कोर्ट ने आदेश में क्या कहा ?

मामले में चौथी बार फिर मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पुलिस अधिकारी, जेलर सहित हमीदिया अस्पताल के तत्कालीन मेडिकल ऑफिसर के खिलाफ हत्या और सबूत मिटाने का केस दर्ज करके समन जारी किए। कोर्ट ने आदेश में कहा कि ज्यूडिशियल कस्टडी में मारपीट से हुई मौत समाज में गहरा धब्बा होता है।

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